किसान भागीदारी, प्राथमिकता हमारी अभियान के तहत शुक्रवार को भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (आईआईवीआर) शाहंशाहपुर में प्रयागराज के 50 किसानों को जैविक खेती के लिए प्रशिक्षित किया गया। यहां किसानों को खर पतवार से होने वाले नुकसान और निदान के बारे वैज्ञानिकों ने जानकारी दी।
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. एसके सिंह ने किसानों को बताया कि जैविक खेती से पर्यावरण और मिट्टी को कोई नुकसान नहीं होता बल्कि उत्पादन ज्यादा होने के साथ बिमारियों के कम होने से किसानों की आय में वृद्धि होती है। जैविक खेती का प्राथमिक उद्देश्य खर पतवारों का प्रबंधन होता है। खरपतवार भी उसी भूमि में उगते हैं जहां फसलें लगाई जाती हैं। अपने विकास के लिए ये खेत से आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण करते हैं, जिससे फसल का उत्पादन प्रभावित होता है। खर पतवारों को समाप्त करने या कम करने के लिए इनकी कटाई की जाती है या प्लास्टिक की पतली पन्नी कि सहायता से भूमि के अधिकतर भाग को ढक दिया जाता है, जिससे इनके उत्पादन को नियंत्रित किया जा सकता है। इस दौरान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. नीरज सिंह, डॉ. शुभदीप रॉय, डॉ. सुधाकर पांडे मौजूद रहे।