बलिया। जिले की दो नगर पालिका और दस नगर पंचायतों में 11 मई को मतदान होना है। बीते 17 अप्रैल से चल रही चुनावी प्रक्रिया के तहत मतदान में अब महज 48 घंटे शेष हैं। मंगलवार की शाम पांच बजे से चुनाव प्रचार थम गया। ऐसे में दलीय और निर्दल उम्मीदवार जीत के लिए जातिय गुणा-गणित फिट करने में जुट गए हैं। ताकि चुनावी रण को फतह किया जा सके। इसके लिए जातिय आकंड़ों के जानकार प्रत्याशियों के वार रूम में माथापच्ची कर जाति विशेष के लंबरदारों को अपने पाले में करने और उनके माध्यम से उम्मीदवारों को समर्थन देने की घोषणा भी कराने में जुट गए हैं।
नगर पालिका, बलिया की बात करें तो निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त आकंड़ों के मुताबिक वर्ष 2023 में शहर क्षेत्र की आबादी एक लाख तीस हजार 70 (अनुमानित) बताई गई हैं। जबकि वर्ष 2017 में आबादी 117409 थी। इनमें एक लाख आठ हजार 674 वोटर हैं। इनमें 59 हजार 807 पुरुष और 48867 महिला मतदाता हैं। लेकिन उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ा पेच जाति आधारित मत है। नगर पालिका के आंकड़ों पर गौर करें तो नपा क्षेत्र में सबसे अधिक 56.28 फीसदी वोटर सामान्य वर्ग के हैं। इनमें ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार के अलावा कायस्थ और पंजाबी वर्ग के साथ-साथ खान/पठान और बरनवाल बिरादरी के लोग भी शामिल हैं। हालांकि चेयरमैन के लिए हो रहे चुनाव में सामान्य वर्ग के पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें एक ब्रह्मण, दो क्षत्रिय, एक भूमिहार और एक कायस्थ वर्ग का है। इसके अलावा पिछड़ा वर्ग के 31.6 फीसदी वोटर भी चुनाव में अहम भूमिका अदा करने वाले हैं। जबकि पिछड़ा वर्ग से ताल्लुक रखने वाले छह प्रत्याशी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। इनमें दो गुप्ता, एक रौनियार, एक जायसवाल, एक वर्मा और एक सोनार बिरादरी से है। इसके अलावा नगर में अनुसूचित जाति के 8.33 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति के 3.77 फीसदी वोटर भी जीत-हार में ऐन वक्त पर अहम किरदार अदा करते है। हालांकि इन दोनों समुदायों से भी नपा अध्यक्ष के लिए तीन उम्मीदवार चुनावी रण में अपना भाग्य आजमा रहे हैं। अब यह देखना रोचक है कि 11 मई को किस उम्मीदवार को सभी जातियों का समर्थन प्राप्त होता है।