वाराणसी में अलईपुरा में पुलिस ने आज अवैध स्लाटर हाउस को सील कर दिया। करीब तीन घंटे तक चली इस कार्रवाई के दौरान स्लाटर हाउस के मालिक कागजात नहीं दिखा सके। वहीं कार्रवाई के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए।
उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया। पुलिस और स्थानीय लोगों में बहस भी हुई। बता दें कि सूबे की नई सरकार ने अवैध बूचड़खानों को तत्काल बंद करने का सख्त निर्देश दिया है लेकिन शहर में बूचड़खानों का ‘बड़ा खेल’ चल रहा है। अवैध बूचड़खानों की छोड़िए, यहां के वैध बूचड़खानों के संचालन पर भी शासन ने पहले से रोक लगा रखी है।
वजह, इनका घनी आबादी के बीच होना, इनसे फैलता प्रदूषण, गंदगी और सीवेज समस्या। लेकिन, हालात कुछ और ही गवाही दे रहे हैं। शासन की रोक के बाद कागज पर तो स्लाटर हाउस बंद दिखा दिए गए लेकिन उनका संचालन नहीं रुका।
कारण, नगर निगम और पुलिस और संचालकों की गठजोड़। मोटी कमाई के लिए शासन की आंखों में धूल झोंकने की यह कवायद सोमवार की शाम तक जारी थी। वहीं, नगर निगम, पुलिस और प्रशासन सब अपने दावे पर कायम थे कि कहीं कोई एक भी स्लाटर हाउस संचालित नहीं हो रहा है।
बेनियाबाग, कमलगड़हा (गोलगड्डा), कचहरी (अर्दली बाजार) में पशु वधशालाएं हैं। इसके अलावा, भेलूपुर और हुकुलगंज में अवैध बूचड़खाने संचालित होते हैं। जो कहीं रिकॉर्ड में ही नहीं हैं। सब कुछ नगर निगम और पुलिस की मिलीभगत से चलता है। वहीं, बेनियाबाग, कमलगड़ा और कचहरी के स्लाटर हाउस पर शासन स्तर से रोक लगी हुई है।