सूबे में सत्ता परिवर्तन होते ही खनन बेल्ट और वीआईपी सिंडिकेट पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। जिलाधिकारी ने गिट्टी परिवहन के नाम पर तय धनराशि से वीआईपी वसूली बंद करा दी है।
खनिज मूल्य, टैक्स और खर्च आदि जोड़कर एक पन्ना परमिट का दाम 4500 पड़ता है जबकि सिंडिकेट प्रति पन्ना परमिट 6250 रुपये में पट्टेधारकों को देता था।
इनमें से 1750 रुपये वीआईपी के नाम पर लिए जाते थे। उधर, वीआईपी बंद होने से लखनऊ से लेकर जिले के सफेदपोश और कुछ अफसरों के होश उड़ गए हैं।
चूंकि प्रति परमिट के हिसाब से वसूले जाने वाले वीआईपी शुल्क से शासन से लेकर स्थानीय स्तर पर लोगों में मैनेज करने में खर्च होता था। ऐसे कईयों की आमदनी बंद हो गई है।