सप्ताह में दो-तीन गाड़ियों को चुराता था और वाहन चोरी करने के बाद उसे बिहार ले जाकर 3 से 4 हजार रुपये में बेच देता था। चोरी की मोटरसाइकिल से बिहार में शराब की तस्करी करते हैं। वह पंकज कक्षा 7वीं तक पढ़ाई करने के बाद काम की तलाश में बनारस आ गया था। इसके बाद उसने मोटरसाइकिल चोरी करना अपना मुख्य पेशा बना लिया।
केवल लंका इलाके से अभी तक 50 मोटरसाइकिल से अधिक चुराकर बिहार में बेच चुका है। उसके गैंग के सदस्य बिहार में बंद हैं। पंकज ने वाहन चोरी करने के लिए अपनी टीम का एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। गाड़ी को चुराने के पहले उसकी फोटो खींचकर ग्रुप में डालता है।
ग्रुप में खरीदने बेचने और मध्यस्थता करने वाले जुड़े हैं। गाड़ियों की फोटो देखने के बाद उधर हां की हरी झंडी मिलते ही गाड़ी को लेकर निकल जाता। गाड़ी को चुराने के बाद सीधे बिहार में ही जाकर रुकता था। उसका कहना है कि जब तक वाहन स्वामी चोरी की सूचना पुलिस को देंगे तब तक वह हाईवे पकड़ कर चंदौली पहुंचता। वहां से सीधे बिहार पहुंच जाता। गाड़ी चोरी करने के लिए मास्टर चाबी बनवाकर अंजाम देता है।
उसके निशाने पर अधिक माइलेज देने वाली मोटरसाइकिलें होती थीं। होंडा साइन और स्प्लेंडर की मांग उसके गैंग में अधिक होती। बिहार में तीन से चार हजार में गाड़ियों को खरीदकर उससे शराब की तस्करी करते हैं। पकड़े जाने पर मोटरसाइकिल छोड़कर भाग जाते।
90 हजार की मोटरसाइकिल को चुराकर 3 से 4 हजार रुपये में बेचते हैं। उसके गैंग के पकड़े गए रमजान अंसारी, अमन सिंह, जितेंद्र कुमार, दीपक कुमार, संदीप चौरसिया, दीपक चौरसिया हैं। सभी की उम्र 22 से 27 साल के बीच में हैं।