वाराणसी के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दुर्व्यवहार करने, जान से मारने की धमकी देने और फर्जी मुकदमे में फंसाने के मामले में रोहनिया इंस्पेक्टर परशुराम त्रिपाठी समेत पांच के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना करने का आदेश दिया है। साथ ही, अदालत ने इस मामले की विवेचना सीओ स्तर के अधिकारी से कराने को कहा है।
रोहनिया थाना के गौरा निवासी नलिनी उपाध्याय ने कोर्ट में आवेदन दिया था। प्रार्थना पत्र में कहा था कि बड़े पिता जयकृष्ण के साथ उनका जमीन का विवाद चल रहा था। बड़े पिता ने रोहनिया थाने की पुलिस को अपने प्रभाव में लिया। इसके बाद आए दिन पुलिस उन्हें रोहनिया थाने पर बुलाकर अपमानित करती थी। पिछले साल 21 फरवरी को एक सिपाही ने उन्हें अपने साथ ले जाकर मारपीट कर पैसा छीन लिया था। उस समय सौ नंबर पर शिकायत की गई थी।
शिकायत से नाराज होकर अगले दिन कई पुलिस वाले घर पर आकर तोड़फोड़ किए थे। यही नहीं, विपक्षी के प्रभाव में आकर गालीगलौज के मामले में वारंट दिखाकर पुलिस उन्हें चौकी पर ले जाकर बेहरमी से पीटी थी। धमकी दी गई थी ज्यादा शिकायत करोगे तो फर्जी मुकदमे में फंसा कर जीवन बर्बाद कर देंगे। इसे लेकर आलाधिकारी से गुहार लगाई गई, लेकिन कोई करवाई नहीं हुई तो कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। अदालत ने प्रार्थना पत्र पर सुनवाई करते हुए मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया। रोहनिया इंस्पेक्टर के अलावा तीन अन्य पुलिसकर्मियों में मातलदेई के तत्कालीन चौकी इंचार्ज जनक सिंह, एसआई अभिषेक कुमार राव और सिपाही दीपक यादव शामिल हैं।