गौरी पशुपतेश्वर महादेव
- फोटो : अमर उजाला
गौरी पशुपतेश्वर महादेव मंदिर का प्रवेश द्वार दुर्गा घाट पर और गर्भगृह पंचगंगा घाट पर है। बाबा का विग्रह पंचगंगा घाट के केंद्र बिंदु पर विराजमान है। मंदिर के अग्निकोण में हनुमान जी का विग्रह है। मंदिर के सेवादार रिशु महाराज का कहना है कि यह देश का इकलौता मंदिर है जहां पर अग्निकोण में बजरंगबली का विग्रह स्थापित है।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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चैत्र प्रतिपदा पर भगवान शिव का शैलपुत्री स्वरूप में, द्वितीया पर ब्रह्मचारिणी, तृतीया पर चंद्रघंटा, चतुर्थी पर कूष्मांडा, पंचमी पर स्कंदमाता, षष्ठी पर कात्यायनी, सप्तमी पर कालरात्रि के स्वरूप में शृंगार हुआ। अब अष्टमी पर महागौरी और नवमी पर सिद्धिदात्री स्वरूप में शृंगार होगा।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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रिशु महाराज ने बताया कि भगवान शिव को शक्ति स्वरूप में तैयार करने में रोजाना छह से सात घंटे का समय लगता है और कभी-कभी तो 12 से 14 घंटे भी लग जाते हैं। बाबा को मां के स्वरूप में सजाने के लिए इत्र, चंदन, माला-फूल, फल, भोग, देशी घी, चमेली का तेल, तिल का तेल का इस्तेमाल करते हैं। सबसे कठिन शृंगार माता के चौथे स्वरूप कूष्मांडा और सातवें स्वरूप महाकाली का होता है।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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पांच रंग का है मंदिर में शिवलिंग, पड़ती है सूर्य की पहली किरण
गौरी पशुपतेश्वर महादेव का शिवलिंग अपने आप में अद्भुत है। काशी रहस्य में मंदिर का वर्णन मिलता है। मंदिर का शिवलिंग सफेद, नीला, भूरा, पीला और काले रंग का है। सूर्य की पहली किरण सीधे शिवलिंग पर पड़ती है और इससे ही गौरी पशुपतेश्वर महादेव का पहला अभिषेक होता है।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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गुरु की प्रेरणा से मंदिर में कर रहे हैं सेवा
रिशु महाराज ने बताया कि वह इस मंदिर में 2010 से अपने गुरु की प्रेरणा से सेवा कर रहे हैं। उनके गुरु अघोरेश्वर रवींद्र नाथ योगेश्वर की इच्छा थी कि वह इस मंदिर की सेवा करें लेकिन उनका निधन हो गया। उनके निधन के बाद मुझे पता चला कि गुरुदेव की यह अंतिम इच्छा थी तो मैंने अपने गुरु की इच्छा पूरी करने के लिए इस मंदिर में सेवा शुरू कर दी।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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पहली बार किसी मंदिर में होगा महारुद्र का आयोजन
महाशिवरात्रि पर अगले साल के शृंगार का निर्णय हो जाता है। इस बार महाशिवरात्रि पर चार प्रहर के महारुद्र के आयोजन का निर्णय हुआ है। इसमें बाबा की हल्दी, विवाह की रस्म के बाद महाशिवरात्रि के दिन चार प्रहर का महारुद्र होगा।
गौरी पशुपतेश्वर महादेव
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इसमें 21 या 51 ब्राह्मणों द्वारा पार्थिव शिवलिंग का रुद्राभिषेक कराया जाएगा। यह काशी का पहला मंदिर होगा जहां महाशिवरात्रि पर महारुद्र का आयोजन होगा।