जैन मुनि आचार्य विशद सागर महाराज ने कहा कि मार्दव धर्म कहता है कि नभ में जाना है तो नमना सीखो, अपने अहंकार का त्याग करो। मार्दव धर्म मृदुता, कोमलता, विनम्रता और झुकने का धर्म है। जो व्यक्ति झुकता है वही महान बनता है। वह शनिवार को श्री दिगंबर जैन समाज काशी के तत्वावधान में चल रहे पर्यूषण महापर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव का ज्ञान दे रहे थे।
विशद सागर महाराज ने कहा कि त्याग स्नेह से श्रेष्ठ है, चरित्र सुंदरता से श्रेष्ठ है। मानवता संपत्ति से श्रेष्ठ है परंतु परस्पर संबंधों को जीवित रखने से अधिक कुछ भी श्रेष्ठ नहीं है। इसलिए संबंधों की हमेशा रक्षा किजिए। सदाचारी बनना है तो अभिमान को त्यागना होगा। मन को मान में नहीं अपने भगवान के गुणगान में लगाने वाले के पास अहंकार, अभिमान कोसों दूर रहता है। उत्तम मार्दव धर्म उसके पास हमेशा रहता है।
शनिवार को प्रात: मंदिर में तीर्थंकरों का अभिषेक के साथ मानव कल्याण के लिए रिद्धि-सिद्धि, बुद्धि-वृद्धि प्रदायक विधान आयोजित किया गया। शहर के सभी जैन मंदिरों में तीर्थंकरों का पूजन, अभिषेक के व्रत, उपवास, स्वाध्याय, जाप किया गया। शाम को मंदिरों में प्रवचन के बाद भजन, जिनवाणी, पूजन, शास्त्र पूजन, तीर्थंकरों की आरती उतारी गई। महिला मंडल द्वारा भेलूपुर जैन मंदिर में आर्यिका 105 सरसमति माता के सानिध्य में बच्चों द्वारा स्तुति और भजन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान दीपक जैन, राजेश जैन, अरुण जैन, विनोद जैन, तरुण जैन, राजकुमार बागड़ा आदि मौजूद रहे।