गोसाईपुर अनौरा गांव में ईंट भट्ठे में हुए हादसे की प्रथम दृष्टया वजह जो सामने आई है वह यह है कि दीवार पुरानी होने के कारण कमजोर थी। इसके साथ ही वहां निगरानी करने के लिए भी कोई नहीं था कि कौन आ-जा रहा है। फिलहाल, प्रशासन की टीम हादसे की पड़ताल कर रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई का खाका तैयार किया जाएगा। वहीं, हादसे में जान गंवाने वाली दोनों महिलाओं के पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार को पुलिस ने उनका शव उनके परिजनों को सौंप दिया।
बड़ागांव थाना के भगतूपुर गांव की माला देवी (45) और लालमनी देवी (65) बृहस्पतिवार की शाम गोसाईपुर अनौला स्थित ईंट भट्टे से कोयला इकट्ठा करने गई थीं। भट्ठे की चिमनी के समीप कोयला इकट्ठा कर रही माला देवी और लालमनी देवी पर ईंट की दीवार भहरा कर गिर गई थी। हादसे में दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। शुक्रवार को अजगरा विधायक त्रिभुवन राम और जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि शंभू यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियाें ने गांव में पहुंच कर दोनों महिलाओं के परिजनों से मुलाकात की।
दोनों महिलाओं की मौत की वजह से उनकी बस्ती में चूल्हे नहीं जले और शुक्रवार को भी सन्नाटा पसरा रहा। वर्हीं, इंट भट्ठे पर तैनात मुंशी रामअवध राम ने बताया कि घटना उनके आंखों के सामने हुई। दोनों महिलाओं को अंदर जाने से मना किया गया था, लेकिन वे बात नहीं मानीं। भट्ठा मालिक द्वारा दोनों महिलाओं के परिजनों को सहायता राशि दी गई है।
अधिकतर घरों में कोयले पर बनता है खाना
भगतूपुर की दलित बस्ती में अधिकतर घरों में मिट्टी की बनाई हुई भट्ठी पर कोयले से ही खाना बनता है। महिलाएं ईंट भट्ठे से कोयला बीन कर लाती हैं। कोयले में पानी और गोबर मिलाने के बाद उसका छोटा-छोटा गोला बना देती हैं। उसी से भट्ठी पर खाना पकाती हैं।
चिमनी के पास खड़े होने में लग रहा डर
ईंट भट्ठा काफी पुराना है और उसकी चिमनी का प्लास्टर भी उखड़ गया है। कई जगह दरारें भी पड़ गई हैं। घटना के बाद चिमनी को देखकर भी डर लग रहा है। चिमनी पुरानी होने के कारण ही बृहस्पतिवार की रात में एनडीआरएफ की टीम को बुलाना पड़ा। समय पर यदि उसका मरम्मत नहीं की गई तो किसी दिन पुन: ऐसी घटना की पुनरावृत्ति हो सकती है।