काशी आए प्रवासियों का दर्द यह है कि भारत को अब भी दूसरे देश एक लेबर मंडी के रूप में ही देखते हैं। वे चाहते हैं कि दूसरे देशों का नजरिया बदले। खासकर उनके लिए जो यूपी, बिहार के साथ पूर्वांचल के लाखों लोग अपनी बेहतरी के लिए दूसरे देशों में जाकर बसे हैं।
भारत के लोगों के दिमाग और श्रम का इस्तेमाल दूसरे देश बखूबी कर रहे हैं। इसके एवज में जो पैसा उन्हें मिलता है, वह उस देश के हिसाब से काफी कम होता है। यूएस, मॉरीशस, मलयेशिया से आए प्रवासियों में हरसिमरत कौर, धनंजय, हरि कुमार आदि ने कहा कि दूसरे देशों में हर क्षेत्र में भारतीय आगे हैं।
वहां कई अत्याधुनिक तकनीकों को विकसित करने में भारतीयों के दिमाग का इस्तेमाल किया गया है। दूसरे देशों की जीडीपी को बढ़ाने में भी प्रवासी भारतीयों का बहुत बड़ा योगदान है। रक्षा क्षेत्रों में हो रहे अनुसंधान के क्षेत्र में भी भारतीय अन्य देशों की अपेक्षा आगे हैं। ऐसे लोगों को उचित प्लेटफार्म की आवश्यकता है।
दूसरे देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों को एकजुट करने की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। आज भी कई प्रवासी ऐसे हैं जो अपनी माटी को प्रणाम करना चाहते हैं। प्रवासी भारतीयों के लिए बेहतर नीति बनाना चाहिए ताकि उन्हें और सुविधाएं अपने मातृभूमि वाले देश में मिल सके।