प्रधानमंत्री की सोच को आगे बढ़ाते हुए विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि यह सम्मेलन अपनी जड़ों की खोज ही नहीं है बल्कि यह भारत के विकास की कहानी का अंग भी है। सम्मेलन से उत्सव तक के सफर की बात पर पिछले 14 प्रवासी भारतीय सम्मेलनों में शामिल हो चुके यूएई से आए वासु श्राफ ने कहा कि गंगा किनारे बसी काशी में बेहद ही शानदार तरीके से आयोजन हो रहा है।
काशी के बाद प्रयागराज में कुंभ में शामिल होना और फिर नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड देखना उत्सव जैसा ही तो है। मिस्त्र के काहिरा से आए भारतीय सामुदायिक संघ के प्रतिनिधि जहीर शाह ने कहा कि इस बार का आयोजन बेहद ही शानदार तरीके से हो रहा है। हिंदुस्तान को जानने-समझने के लिए यहां की कला, संस्कृति और विरासत से रूबरू होना बेहद जरूरी है।
इंडोनेशिया से आईं गीता कौर कहती हैं कि गलियों के शहर काशी और इसके बाद त्रिवेणी के संगम पर बसे प्रयागराज में आस्था के कुंभ में डुबकी लगाना मानो सपने सरीखा है। ऐसे भव्य आयोजन के लिए हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री मोदी का हृदय से आभार...।