पूर्वाचल के कंडम वाहनों को नष्ट करने के लिए पहला कलेक्शन सेंटर बड़ालालपुर में खुल गया है। अब 15 वर्ष की उम्र पूरा करने और दोबारा पंजीकरण न होने वाले वाहनों को सेंटर में खड़ा कराया जाएगा। वाराणसी में ही एक लाख से ज्यादा कंडम वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
पर्यावरण में प्रदूषण स्तर कम करने के लिए 15 वर्ष पुराने वाहनों को कंडम घोषित करने का अभियान वाराणसी में भी शुरू हो गया है। बड़ालालपुर में वाहनों को खड़ा कराने का सिलसिला चल रहा है। चार दिन में 12 कंडम वाहन खड़े कराए गए हैं।
अब तक एक लाख से ज्यादा वाहन कंडम घोषित
वर्ष 2012 से अब तक वाराणसी में एक लाख से ज्यादा वाहनों को कंडम घोषित किया जा चुका है। इनमें सबसे ज्यादा 40 हजार चार पहिया वाहन हैं। 30 हजार दो पहिया और 20 हजार व्यावसायिक वाहन भी कंडम घोषित किए जा चुके हैं। 10 हजार तीन पहिया वाहन भी कंडम हैं।
अभियान चलाकर खड़े कराए जाएंगे वाहन
शासन से लागू कबाड़ नीति के अनुसार, कंडम वाहनों को 22 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा जा सकता है। वाहन के कुल वजन का 65 फीसदी हिस्सा ही उसका मूल वजन माना जाएगा। जो धनराशि बनेगी, उसका 90 फीसदी ही भुगतान होगा। कंडम गाड़ी बेचने वाले को नए वाहन खरीदने पर छूट का प्रमाण पत्र दिया जाएगा। नए वाहन की खरीद पर कंडम गाड़ी बेचने का प्रमाण पत्र देने पर पंजीकरण शुल्क में 10 फीसदी की छूट मिलेगी।
वाराणसी में जौनपुर की सीमा पर दूसरा कलेक्शन सेंटर भी खोलने की तैयारी है। इसके लिए सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। निजी कंपनी के सहयोग से खुलने वाले इस कलेक्शन सेंटर का लाभ वाराणसी के साथ ही जौनपुर के लोगों को भी मिलेगा।