गंगा उसपार अवैध बालू खनन को लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अख्तियार किया है। मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने जिलाधिकारी से सभी आवश्यक दस्तावेज और बालू खनन की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता डॉ. अवधेश दीक्षित ने बताया कि प्रधान पीठ एनजीटी की दो सदस्यीय पीठ के समक्ष वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता की ओर से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अधिवक्ता सौरभ तिवारी ने पक्ष रखा। याचिका में कहा है कि 2021 में बरसात के पहले गंगा नदी में लगभग 12 करोड़ की लागत से नहर की खोदाई पर्यावरणीय नियम कानूनों के विरुद्ध किया। नहर निर्माण से निकली बालू को निस्तारित करने के लिए एक जून 2021 को निविदा निकाली गई। लेकिन गंगा नदी में आई बाढ़ के बाद न गंगा में नहर बची और न नहर खोदाई से निकली बालू। आरोप लगाया कि खनन पदार्थ उठान के नाम पर नदी के पर्यावरण से छेड़छाड़ करते हुए बालू उठान के नाम पर लूट और भ्रष्टाचार किया गया।