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जज्बाः कोरोना संक्रमित युवती आइसोलेशन वार्ड में भी करती रही सिविल सर्विसेज की तैयारी, कोरोना को मात देकर घर लौटी

Fri, 08 May 2020 11:26 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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एंबुलेंस से अस्पताल ले जाए जाते मरीज। - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना को मात देकर लौटी व्यापारी की पोती आइसोलेशन वार्ड में भी सिविल सर्विसेज की तैयारी करती रही। तैयारी में कोई रुकावट न आए, इसके लिए वह घर से अपना लैपटॉप भी लेकर गई थी। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक करने वाली व्यापारी की पोती ने बताया कि इंटरनेट के माध्यम से सिविल सर्विसेज परीक्षा से जुड़े पेपर के पैटर्न की जानकारी सहित अन्य तैयारियां जारी रहीं।

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इसके अलावा भाई भी कापी किताब लेकर गया था, जहां दोनों रोजाना घर की तरह पढ़ाई करते रहे। इसके पीछे बस यही उद्देश्य था कि हॉस्पिटल में किसी तरह का कोई तनाव न रहे। वहीं, कोरोना को मात देने वाली व्यापारी के बेटे ने बताया कि दिल्ली से बाबूजी की मेदांता हॉस्पिटल में जांच कराकर लौटने के बाद महमूरगंज स्थित अस्पताल में आंख की जांच कराने गए। इसके बाद गैलेक्सी अस्पताल गए, जहां डाक्टरों ने निमोनिया होने की जानकारी देते हुए जांच कराने को कहा। इसके बाद से घर में पूरी सतर्कता बरती गई।

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न खांसी, न बुखार, कैसे हुआ कोरोना, समझ से परे

कोरोना संक्रमण के लक्षण सर्दी, खांसी, जुकाम, बुखार और सांस फूलना तो है लेकिन संक्रमित होने वाले कई ऐसे मरीज हैं, जिनमें ऐसे कोई लक्षण नहीं मिले हैं। कांटैक्ट ट्रेसिंग के आधार पर जब सैंपलिंग हुई तो उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। कुछ इसी तरह की कहानी पितरकुंडा निवासी दवा कारोबारी के घर संक्रमित हुए तीन सदस्यों की है।

कोरोना को मात देकर घर लौटे सदस्यों ने बताया कि डर को भूल मजबूत हौसले से इस जंग को जीता। घर में भी वह सतर्कता बरत रहे हैं। घर के मुखिया (सुपारी व्यापारी) की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के पहले से भी पूरा परिवार संक्रमण से बचाव के लिए घर से बाहर नहीं निकल रहा था। व्यापारी के बेटे ने कहा कि जिन सदस्यों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई वे बाबू जी के नजदीक नहीं रहे और घर से बाहर भी नहीं गए। विश्वास नहीं हो रहा कि संक्रमण हुआ कहां से। 

बीमारी को कभी हावी ही नहीं होने दिया
व्यापारी के पोते और पोती का कहना है कि उन्होंने कभी अपने ऊपर बीमारी को हावी ही नहीं होने दिया। अस्पताल में रहने के दौरान भी कभी ऐसा लगा ही नहीं कि वह हॉस्पिटल में हैं और कोरोना जैसी महामारी की चपेट में हैं। उन्होंने कहा कि शुरुआत में दो दिन डर लगा, लेकिन डाक्टरों हौसला बढ़ाती रही। जब मन दुखी हो जाता था तो घर के सदस्यों से बात करते थे।
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