फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नीट परीक्षा: सॉल्वर गैंग-2 का मास्टरमाइंड समेत दो गिरफ्तार, पुलिस को बताया- किस तरह होता है पूरा खेल

Sun, 19 Sep 2021 12:19 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग के छह सदस्यों को वाराणसी  पुलिस ने गिरफ्तार किया है। फरार मास्टरमाइंड प्रेम कुमार उर्फ पीके की तलाश जारी है। 
विज्ञापन
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नीट परीक्षा में सॉल्वर गैंग-टू के मास्टर माइंड विकास महतो और फोटो शॉपर राजू कुमार को सारनाथ पुलिस व क्राइम ब्रांच ने शनिवार को डूडा कार्यालय के पास से गिरफ्तार किया। दोनों के कब्जे से परीक्षा से संबंधित अभ्यर्थियों के शैक्षिक दस्तावेज, फोटोग्राफ, आधार कार्ड व एडमिट कार्ड के अलावा दो मोबाइल फोन व एक लैपटॉप बरामद हुआ है। दोनों बिहार के रहने वाले हैं। पुलिस की पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली है।

विज्ञापन


अब तक सॉल्वर गैंग के छह सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। फरार मास्टरमाइंड प्रेम कुमार उर्फ पीके की तलाश जारी है। पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि गिरफ्तार विकास महतो निवासी सिकड़ी, खगड़िया (बिहार) और फोटो शॉपर राजू कुमार (बिहार) जहानाबाद के काको थाना अंतर्गत चंदवारा गांव का रहने वाला है।

पूछताछ में विकास महतो ने बताया कि तीन वर्ष पहले खगड़िया से पटना आया था। परीक्षा की तैयारी के दौरान   परिचय पीके उर्फ प्रेम कुमार उर्फ नीलेश से हुआ। उसने मुझे परीक्षाओं में सॉल्वर बिठाकर परीक्षा पास कराने की तरकीब बताकर रुपये कमाने की राह दिखाई और कहा कि मौका मिलने पर तुम्हारी नौकरी भी किसी परीक्षा में सॉल्वर बैठाकर लगवा दूंगा।
विज्ञापन

पढ़ेंः बीएचयू में भानु प्रताप सिंह: अटल इन्क्यूबेशन सेंटर का किया दौरा, बोले- नवाचार, उद्यमिता को बढ़ावा देना सरकार का मुख्य उद्देश्य

उसकी  बातों में आकर उनके गिरोह में जुड़ गया और पीके के लिए काम करने लगा।  पुलिस आयुक्त ने बताया कि  पीके का पूरा नाम प्रेम कुमार उर्फ पीके उर्फ नीलेश है, जो बिहार छपरा के एकमा थाना क्षेत्र सेंधवा का निवासी है। इस समय वह बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज के सामने पाटलिपुत्र, पटना में सपरिवार रह रहा है।

पीके के गिरोह में कई लोग जुड़े हुए हैं। फोटो शॉपर राजू कुमार ने पुलिस को बताया कि छोटे भाई दीपक के नाम से दीपक स्टूडियो है। साल 2019 में विकास के संपर्क में आया, विकास परीक्षाओं में पासपोर्ट साइज फोटो बनवाने के लिए स्टूडियो पर आता था। बाद में मेलजोल बढ़ा तो अन्य छात्र व छात्राओं की फोटो को मिक्स कर पासपोर्ट साइज का बनवाने लगा।

प्रत्येक मिक्स फोटो पर विकास से दो हजार रुपये लेता था। प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान विकास ने मुझसे कई लड़के व लड़कियों की फोटो व्हाट्सएप पर भेजी थी, जिसे मिक्सिंग करके प्रिंट किया गया।

सबसे पहले गिरफ्तार हुई थी मां-बेटी

पिछले रविवार को आयोजित नीट परीक्षा के दौरान सारनाथ के सोनातालाब स्थित केंद्र से पुलिस ने दूसरे अभ्यर्थी की जगह पर परीक्षा दे रही सॉल्वर गैंग की सदस्य पटना निवासी जूली कुमारी और परीक्षा केंद्र के बाहर से उसकी मां बबिता को गिरफ्तार किया था।

बीएचयू बीडीएस छात्रा जूली कुमारी को गिरोह में सॉल्वर के तौर पर विकास महतो से संपर्क कराने वाले जूली के भाई अभय कुमार और लखनऊ केजीएमयू के डॉ. ओसामा शाहिद को पुलिस ने मंगलवार को पहड़िया से पकड़ा था। चारों इस समय जेल में बंद है। तभी से विकास महतो की तलाश में पुलिस की टीमें दबिश दे रही थी।

20 से 25 लाख में तय होता था सौदा

नीलेश और अपने साथियों पुष्पक कुमार, प्रमोद, अनूप व प्रवीन के माध्यम से सॉल्वरों की व्यवस्था करते थे व उनके फोटो आदि लेकर असली अभ्यर्थी की फोटो से मिक्स करवाकर नीट परीक्षा का फॉर्म भरवाते थे। सॉल्वरों को परीक्षा में बैठने के एवज में पांच लाख दिए जाते थे। असली अभ्यर्थियों के अभिभावकों से 20 से 25 लाख रुपये में सौदा होता है।

परीक्षा के पहले ही उनके सभी ओरिजिनल डॉक्यूमेंट पीके उर्फ नीलेश अपने पास मंगा कर गारंटी के तौर पर रख लेता था और एडमिशन के समय पर पैसा मिलने के बाद वापस किया जाता था। रकम को पीके अपने पिता केबीएन सिंह के बैंक अकाउंट के अलावा अपने अन्य साथियों के अकाउंट में मंगाता था।
विज्ञापन

गिरोह में कई सॉल्वर, खंगाली जा रही कुंडली

पूछताछ के दौरान विकास ने पुलिस को बताया कि गिरोह में लखनऊ केजीएमयू का डॉ. ओसामा शाहिद, बिहार निवासी अंशु सिंह, बबलू वर्तमान में बंगलूरू में रहता है, त्रिपुरा में रहने वाला देबू सहित अन्य भी गिरोह में शामिल हैं। यह लोग नीट परीक्षा में बैठने वाले लड़के व लड़कियों की तलाश करते हैं, जो कि फर्जी तरीके से परीक्षा पास करने के लिए इनसे संपर्क करते थे। उनके डॉक्यूमेंट व फोटो आदि व रुपये लेकर पीके उर्फ प्रेम कुमार उर्फ नीलेश को भेजते थे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें