मां सरस्वती और भगवान गणेश जूनियर जज के रूप में नजर आएंगे। भगवान कार्तिकय वकील के रूप में बहस करेंगे। इसके अलावा दूसरी सभी मूर्तियों को जज की वेशभूषा में सजाया जा रहा है। छह मिनट के शो के दौरान समाज में महिलाओं के साथ गलत व्यवहार करने वाले महिषासुर को फांसी की सजा सुनाएंगी और उसे पंडाल में ही फांसी पर लटकाया जाएगा। 40 फीट ऊंचे और 20 फीट लंबे पंडाल में सभी मूर्तियां स्वचालित रहेंगी। पूजा समिति के मिहिर ने बताया कि इस बार हम लोग पूजा पंडाल के जरिए महिला सशक्तिकरण का संदेश देंगे।
इस बार दुर्गापूजा में मां विभिन्न स्वरूपों में दिखेंगी। मां कामाख्या, द्वारिकाधीश और हंसते हुए मुद्रा में दिखाई देंगी। मां काली के विराट स्वरूप और रथ पर सवार होकर राक्षसों का वध करते हुए भी दिखाई देंगी। इस बार पूजा समितियां अलग-अलग थीम पर मूर्तियां बनवा रही हैं। खोजवां मूर्ति कारखाने के मूर्तिकार अभिजीत विश्वास ने बताया कि शहर में दो दर्जन से अधिक नामचीन पूजा पंडाल हैं, जिनकी प्रतिमाएं हर साल अलग-अलग थीम पर वनती हैं। पानी के अंदर मां दिखाई देंगी। मां हंसते हुए झूले पर झूलते और मां काली की विराट रूप के समक्ष भगवान शिव तांडव की मुद्रा में दिखेंगी।