कुछ समय बाद बाबाजी अंदर कुटिया में चले गए। धर्मेंद्र मिश्र ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि रात में अचानक कुटिया के अंदर से जोर से चिल्लाने की आवाज आई और दो लोग कुटिया से निकलकर गंगा किनारे की ओर भागे और एक युवक कान्हा उपवन गेट की ओर से निकल गया।
इसके बाद सब कुछ सामान्य हो गया। सुबह जब गांव के कुछ लोग पहुंचे तो देखा कि कुटिया के अंदर खून से बाबाजी लथपथ थे और सामान बिखरा था। सिर और गर्दन से खून बहा था। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने फोरेंसिक टीम को बुलवाया और कुटिया के अंदर और बाहर टीम ने साक्ष्य संकलन किया।
उधर, ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि अक्सर लोग यहां आकर शराब, गांजा पीते हैं, जिन्हें बाबाजी डांटते थे। रात में भी कुछ युवकों को बाबाजी ने डंडा मारकर खदेड़ा था। आशंका व्यक्त की जा रही है कि नशे में धुत उन युवकों ने ही हत्या की घटना को अंजाम दिया।
एसपी ग्रामीण अमित वर्मा ने बताया कि दो नामजद और दो अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर घटना की तफ्तीश की जा रही है। पुरानी रंजिश को भी जोड़कर जांच की जा रही है। एएसपी नीरज पांडेय ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
जाली के अंदर कैसे आए हमलावर
अराजकतत्वों को आश्रम में आने से रोकने के लिए तीन माह पूर्व ही जाली लगाकर बाउंड्री बनाई गई है। आश्रम में दो गेट लगे हैं और अंदर से ताला बंद है। हमलावर जाली के अंदर कैसे प्रवेश किए यह भी पुलिस तफ्तीश कर रही है। आसपास के लोगों से पुलिस ने कई पूछताछ की। आश्रम के पास कान्हा उपवन में लगे सीसी कैमरों को भी पुलिस खंगाल रही है।
कभी-कभार घर आते थे बाबाजी
परिजनों के अनुसार बाबाजी घर में कभी-कभार ही आते थे, इसके अलावा वह हमेशा आश्रम में ही रहते थे। पत्नी की दो साल पूर्व मौत हो चुकी है। तीन बेटे और दो बेटियां है। सूर्यबली यादव बाबाजी छह भाइयों में पांचवें नंबर पर थे। घटनास्थल पर जुटे परिजनों ने पुलिस को बताया कि गांव के ही एक युवक ने हत्या को अंजाम दिया है। दो नामजद व दो अज्ञात के खिलाफ बेटे सुरेश ने तहरीर दी। दो वर्ष पहले भी आश्रम में चोरी हुई थी।
रोहनिया पुलिस की लापरवाही सामने आई
गंगा किनारे अराजकतत्वों का जमावड़ा रहता है। इसको लेकर मारपीट भी होती रहती है। इसकी सूचना कई बार रोहनिया पुलिस को दी गई। लेकिन पुलिस ने घटनाओं को गंभीरता से नहीं लिया। इस बात की चर्चाएं घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने की।