वरुणा नदी की बाढ़ से इसके डूब क्षेत्र के 500 से अधिक मकान जलमग्न हो गए हैं। सीएम के ड्रीएम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर का काम शुरू होने के वक्त ही ‘अमर उजाला’ ने अवैध निर्माणों से बाधित होते नदी के प्रवाह क्षेत्र की ओर प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकृष्ट कराया था। उसके बाद 130 मकानों को सिंचाई विभाग और 762 भवनों को वीडीए ने चिह्नित भी किया लेकिन कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा, डूब क्षेत्र के भवन-मकान तो जलमग्न हो ही गए हैं, आसपास की बस्तियों को अपनी चपेट में लेते हुए बाढ़ का रुख अब शहर की तरफ है।
वरुणा के डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण के लिए जनता ही नहीं, नगर निगम और वीडीए बराबर के दोषी हैं। भू-माफिया ने सरकारी विभागों से मिलीभगत कर नदी के पेटे में घुसकर अवैध निर्माण कराया गया है। राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 50 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। डूब क्षेत्र में किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है। बावजूद इसके यहां सैकड़ों अवैध निर्माण खड़े कर लिए गए। जिसे जैसे बन पड़ा, नदी की जमीन कब्जा कर ली। नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की मिलीभगत से वर्षों से चल रहा यह खेल अब पूरे शहर के लिए संकट का कारण बन गया है।
इस बीच वरुणा की बाढ़ का पानी गोफाबीर मंदिर के समीप आ गया है। इसके दूसरी ओर के मकान भी बाढ़ की चपेट में है। भूतल पर पानी भरने के बाद लोग घरों की छतों पर डेरा डाले हुए हैं। बुद्ध विहार कॉलोनी भी बाढ़ की चपेट में है। नदी किनारे बने कुछ होटलों के बेसमेंट में पानी घुस गया है। जदीद बाजार के भूपेंद्र और गोफाबीर के अमित मानते हैं कि डूब क्षेत्र में अवैध निर्माणों के चलते नदी का बहाव प्रभावित हुआ है।