ओम प्रकाश राजभर के घर पहुंचे कैबिनेट मंत्री
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ओमप्रकाश राजभर को साथ लाने में भाजपा अपना फायदा देख रही है, लेकिन उनकी शर्तों में बंधने को तैयार नहीं है। फिलहाल ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि 2024 के आम चुनाव से पहले ओपी राजभर अपने लाव लश्कर के साथ एक बार फिर भाजपा के सहयोगी बन जाएंगे।
बेटे-बहू को आशीर्वाद देने के लिए केवल भाजपा नेताओं का ही जमावड़ा नहीं लगा बल्कि विपक्ष के भी कई नेता पहुंचे। मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी की सहयोगी रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी, ओम प्रकाश सिंह व सपा नेता व विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे रामगोविंद चौधरी समेत कई अन्य सपा नेता राजभर के आवास पर पहुंचे और बातचीत की।
ओम प्रकाश राजभर के घर पहुंचे विपक्ष के नेता
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इसके तमाम राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भले ही सार्वजनिक मंचों से ओपी राजभर से दूरी बनाने की बात करते हैं, लेकिन उन्हें मिशन 2024 के लिए सुभासपा की जरूरत महसूस हो रही है। इसीलिए जयंत व रामगोविंद को सुभासपा नेता के आवास पर भेजा गया। हालांकि, इस पर खुलकर बोलने को कोई तैयार नहीं है। सबने इसे राजनीति की जगह शिष्टाचार व मंगलकामनाओं की भेंट बताई।
ओमप्रकाश राजभर के घर पहुंचे बीजेपी यूपी के अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी
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मिशन-2024 की तैयारियों में जुटे राजनीतिक दल पूर्वाचल में हर हाल में अपनी जमीन मजबूत करना चाहते हैं। ऐसे में पूर्वांचल की सियासत में खांटी नेता की पहचान रखने वाले सुभासपा प्रमुख ओपी राजभर की जरूरत सभी को महसूस हो रही है। कई मौकों पर भाजपा की तारीफ कर राजभर ने पहले ही अपना झुकाव अपने पुराने सहयोगी दल ओर जता दिया है। भाजपा भी अब उन्हें आम चुनाव से पहले अपने साथ लाने में जुटी है। यही कारण है कि बेटे के विवाह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद शुभकामना संदेश भेजा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दूत के रूप में उनके सलाहकार और पूर्व अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने ओपी राजभर को संदेश दिया।
विधानसभा चुनाव 2022 में सुभासपा ने अपनी ताकत दिखाई थी। सपा का साथ पाने के बाद पार्टी ने अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाए और 12 प्रत्याशी जीतकर विधानसभा पहुंच गए। पूर्वांचल की करीब 20 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर राजभर समाज जीत की राह आसान करता है। गाजीपुर, मऊ, गाजीपुर व बलिया में राजभर मतदाओं की संख्या भी अच्छी है। हालांकि, भाजपा ने अनिल राजभर कैबिनेट मंत्री बनाकर ओपी राजभर का विकल्प बनाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।