भादो मास कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि पर सोमवार को कजरी तीज व बहुला चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजन-अर्चन करेंगी। मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की जोड़ी की आराधना से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
कजरी तीज पर महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनकर अपने आराध्यदेव की पूजा कर व्रत का संकल्प लेंगी। पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित कर नीम की टहनी या पत्तियों से नीमड़ी माता का प्रतीक बनाकर उनकी पूजा करेंगी। शिव-पार्वती को जल, अक्षत, फूल, बेलपत्र, फल और मिठाई अर्पित करेंगी। सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी, बिंदी और चुनरी आदि सुहाग की सामग्री चढ़ाकर पूजा करेंगी। कजरी तीज की कथा सुनेंगी और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद पति के हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण किया। ज्योतिषविदों के अनुसार तृतीया तिथि का समापन सोमवार की रात 08:50 बजे तक रहेगी। पूजन का शुभ मुहूर्त ब्रह्म मुहूर्त 4:51 से 05:37 बजे तक, अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:14 से 1:04 बजे तक, गोधूलि मुहूर्त शाम 6:54 से 7:17 बजे तक है।