निर्दलीय उम्मीदवार धनंजय सिंह।
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इसी तरह भाजपा के लिए भी यहां इतिहास रचने का मौका है। इस सीट से भाजपा मनोज सिंह मैदान में हैं। मनोज सिंह, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष रह चुके हैं। उनकी पत्नी रुबी सिंह बरसठी में पारसनाथ यादव की पत्नी को हराकर ब्लॉक प्रमुख बनीं थीं।
वर्ष 2017 की मोदी लहर में भी मल्हनी सीट गंवाने वाली भाजपा के लिए जीत यहां प्रतिष्ठा का सवाल बन चुकी है। यही कारण है कि यहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो बार सभा की थी। दोनों डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और डॉ दिनेश चन्द शर्मा के अलावा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य की सभा हुई। चुनाव प्रभारी मंत्री अनिल राजभर, जिले के प्रभारी उपेंद्र तिवारी, राज्य मंत्री गिरीश चन्द्र यादव ने लगातार कैंप किए।
पार्टी को अब तक यहां जीत नहीं मिली है। वर्ष 1962 में कुंवर श्रीपाल सिंह को जरूर जीत मिली थी, मगर तब यह रारी विधानसभा सीट थी। 1962 के बाद से कभी भी भगवा खेमे में जीत की खुशी नहीं दौड़ी। यहां तक कि लोकसभा चुनाव में भी पार्टी हमेशा यहां से पिछड़ती रही है। अगर मनोज सिंह इस बार जीत दर्ज करने में कामयाब रहे तो वह भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।
लकी यादव, सपा प्रत्याशी।
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निर्दल उम्मीदवार धनंजय सिंह रारी से दो बार विधायक रहे। पहली बार वर्ष 2002 में भी वह निर्दल ही चुनाव जीते थे। इसके बाद वर्ष 2007 में जदयू के सिंबल पर निर्वाचित हुए। वर्ष 2009 में वह बसपा से जौनपुर के सांसद बने। वर्ष 2012 में पत्नी जागृति सिंह निर्दल तो वर्ष 2017 में वह खुद निषाद पार्टी के सिंबल पर मैदान में उतरे थे। कड़ी टक्कर के बाद भी वह जीत दर्ज नहीं कर सके। अगर धनंजय सिंह को जीत मिली तो वह निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले मल्हनी के पहले विधायक होंगे। इससे पहले रारी में भी उन्होंने ही निर्दलीय चुनाव जीता था।
बसपा से जयप्रकाश दुबे ने अपनी किस्मत को आजमाया है. वह एक स्कूल प्रबंधक हैं। जबकि कांग्रेस से राकेश मिश्रा उर्फ मंगला गुरु मैदान में हैं, जो कांग्रेस मनरेगा निगरानी समिति के अध्यक्ष हैं। मल्हनी में कुल तीन लाख 65 हजार 13 मतदाता हैं। तीन नवंबर को मतदान में 207089 मतदाताओं ने हिस्सा लिया था। इसमें 101979 महिलाएं और 105110 पुरुष मतदाता शामिल रहे।