आचार्य शुभम मिश्र के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपनी कक्षा में परिवर्तन करके दक्षिणायन से उत्तरायण होकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिस राशि में सूर्य का कक्ष परिवर्तन होता है, उसे संक्रांति कहा जाता है। इसके बाद से दिन बड़ा और रात्रि की अवधि कम हो जाती है। इस बार व्यतिपात योग शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि शतभिषा नक्षत्र में सोमवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण की अवधि को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात कहा जाता है।
क्षय होता है पापों का
ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान व दान का विशेष महत्व है। इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और अक्षय फल प्राप्त होता है। जाने-अनजाने जन्मों के किए गए पाप का भी क्षय हो जाता है। मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान कर कंबल, घृत दान, तिल, लडू, वस्त्र आदि दान का विशेष महत्व है। मकर संक्रांति के दिन साधारण नदी भी गंगा नदी के समान हो जाती है।