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वाराणसी: ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में व्यवस्थाएं आपार, शहरी के स्कूल स्मार्ट होने की जोह रहे बाट

Mon, 11 Oct 2021 05:08 PM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्र के 124 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत तो कर दी, लेकिन नगर क्षेत्र के इन जर्जर विद्यालयों की तरफ उनका ध्यान किसी ने आकृष्ट नहीं कराया।
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वाराणसी में विद्यालयों की स्थिति खराब में साफ अंतर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मिशन कायाकल्प के माध्यम से वाराणसी के  ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम परिषदीय विद्यालय स्मार्ट हो चुके हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र के दो दर्जन से अधिक विद्यालयों की दशा बजट के अभाव में खराब है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्र के 124 विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की शुरुआत तो कर दी, लेकिन नगर क्षेत्र के इन जर्जर विद्यालयों की तरफ उनका ध्यान किसी ने आकृष्ट नहीं कराया। पहले नगर क्षेत्र में 100 विद्यालय थे, लेकिन नगर निगम में कुछ गांवों के शामिल होने के बाद अब परिषदीय विद्यालयों की संख्या 165 हो जाएगी।

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बीएसए राकेश सिंह ने कहा कि  नगर क्षेत्र के स्कूलों में कायाकल्प के लिए नगर बजट नहीं उपलब्ध हो पाया है। बजट के लिए नगर आयुक्त पर पत्र खिलकर मांग की गई है, अनुमोदन होने के बाद इन स्कूलों को भी जल्द संवारा जाएगा।
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स्कूल में शिक्षकों की कमी
सिकरौल स्थित प्राथमिक विद्यालय प्रथम में कहने को तो छह कमरे हैं, लेकिन शिक्षकों के अभाव में कक्षा तीन, चार व पांच के बच्चों की पढ़ाई एक कक्षा में चल रही है। विद्यालय में बच्चों की संख्या तो 100 है, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए एक शिक्षामित्र है। हालही में प्राथमिक कन्या पाठशाला के एक अन्य शिक्षक को यहां संबद्ध किया गया है। 

खतरे के साए में पढ़ने को मजबूर हैं नौनिहाल

नई सड़क स्थित प्राथमिक विद्यालय शेख सलीम फाटक को बाहर से देखने पर तो पता ही नहीं चल पाता है कि यह कोई सरकारी विद्यालय है। कारण है नई सड़क पर जूते, चप्पल व कपड़ों के लगने वाली स्थायी दुकानें हैं। विद्यालय की स्थिति भी बहुत ठीक नहीं है, गाडर के सहारे बनी विद्यालय की छत खतरे अहसास कराती है। खिड़की व दरवाजे भी खस्ताहाल हैं। वहीं विद्यालय से सटकर लगे बिजली के खंभे व तारों के जंजाल के बीच बच्चे पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
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बरसात में नहीं मिलती सिर छुपाने की जगह

दशाश्वमेध क्षेत्र के खारीकुंआ प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को बरसात के दौरान सिर छुपाने की थी जगह नहीं मिल पाती है। विद्यालय की छत व दीवारें जर्जर है। इसकी वजह से दीवारों में सीलन बनी रहती है और बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। इसके नीचे बैठकर पढ़ना मुश्किल होता है। वहीं विद्यालय की टूटी हुई सीढ़ियाें के सहारे ही बच्चे अपने कक्षाओं में आते जाते हैं।
 
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