फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दान से विश्वविद्यालय तो बन गया पर जान को मोहताज है आदर्श

Fri, 21 Oct 2016 01:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
विज्ञापन
दान की बुनियाद पर महामना ने इतना बड़ा विश्वविद्यालय तो खड़ा कर दिया, लेकिन उसी विश्वविद्यालय में विज्ञान संस्थान के छात्र अपने एक साथी की जान बचाने के लिए सहयोग राशि मांगने निकले तो उन्हें बेहद निराशा हाथ लगी। अगर दानदाताओं के नाम खोल दिए जाएं तो उन्हें शर्मसार होना पड़ेगा। लाख रुपये से ज्यादा तनख्वाह पाने वाले प्राध्यापकों में कोई 50 तो कोई 100-150 की मदद कर रहा है। बीएचयू प्रशासन चाहे तो स्वत: संज्ञान लेकर कैंसर से जूझ रहे बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र आदर्श निगम की मदद कर उसे मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है।
विज्ञापन



परिसर में घूम रहे ‘अमर उजाला’ संवाददाता की नजर जैसे ही हाथ में दान के लिए बॉक्स लेकर घूम रही छात्र-छात्राओं की टोली पर पड़ी तो वह ठिठक गया। छात्रों से बातचीत में पता चला कि वह ब्लड कैंसर से जूझ रहे कानपुर निवासी बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र आदर्श के इलाज के लिए सहयोग राशि इक ट्ठा कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि पीड़ित छात्र की अधिक से अधिक मदद की जा सके। उसका इलाज एसजीपीजीआई (लखनऊ) में चल रहा है, जिसमें करीब 40 लाख रुपये खर्च होने की संभावना है।


उसके परिवार की हालत भी ऐसी नहीं है कि वे अपने दम पर इलाज करा सकें। धन्य हैं ये सहयोगी छात्र और उनकी यह सोच लेकिन उनका क्या कहें जो इसमें सक्रिय भागीदारी नहीं कर पा रहे हैं। वैसे अगर बीएचयू प्रशासन इस मामले को गंभीरता से ले तो शायद इन छात्रों को दान मांगने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और आदर्श की जान भी बच जाएगी। उधर उसके पिता रामचंद्र निगम ने बेटे के इलाज के लिए कानपुर में जरौली फेज-2 स्थित अपना घर तक गिरवी रख दिया है, इसके बाद भी उन्हें करीब पांच लाख रुपये ही मिलेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें