नक्सली क्षेत्र होने के बावजूद ललितेश ने मड़िहान से 2012 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। यह उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी। युवाओं के चहेते और पूर्वांचल में बड़ा चेहरा होने के बावजूद पार्टी की ओर से ललितेश को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने के बाद भी दलगत कार्यक्रमों में उन्हें तवज्जो नहीं दी जा रही थी।
कई बड़े आयोजनों वहीं मिर्जापुर में पैतृक जमीन पर हुए मुकदमे में नाम आने के बाद पार्टी भी उनके साथ नहीं खड़ी हुई। ललितेश इस मामले में भी अकेले से पड़ गए थे। उनके ऊपर राजनीतिक दबाव भी लगातार बनाया जा रहा था। कांग्रेस खेमे में चर्चाओं का दौर तो जारी है लेकिन कोई भी साफ तौर पर कुछ भी बोलने से बच रहा है।
गांधी परिवार से राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक हैं रिश्ते
पं. कमलापति त्रिपाठी के परिवार से गांधी परिवार का राजनीतिक ही नहीं पारिवारिक रिश्ता भी जुड़ा हुआ है। इंदिरा, राजीव और सोनिया गांधी के सबसे करीबी पं. कमलापति का घराना रहा है। तमाम विरोधों के बावजूद चाहे इंदिरा गांधी रही हों या राजीव गांधी अथवा सोनिया गांधी तीनों के कार्यकाल में न कभी पं. कमलापति को नकारा गया न लोकपति त्रिपाठी को न राजेश पति त्रिपाठी को। इंदिरा गांधी ने तो पं. कमलापति त्रिपाठी को कार्यकारी अध्यक्ष तक बनाया। राजीव गांधी के खिलाफ पंडित जी ने कई बार खुले पत्र जारी किए। बावजूद इसके इस परिवार को किसी ने कभी नकारा नहीं।