बिपति मोरि को प्रभुहि सुनावा, पुरोडास चह रासभ खावा। सीता कै बिलाप सुनि भारी, भये चराचर जीव दुखारी... माता सीता कहती हैं कि प्रभु को मेरी यह विपत्ति कौन सुनाए। यज्ञ के अन्न को गदहा खाना चाहता है। सीताजी का विलाप सुनकर जड़-चेतन सभी जीव दुखी हो गए। सोमवार को संकटमोचन मंदिर प्रांगण में श्री गोस्वामी तुलसीदास रामलीला में नक्कटैया, खरादिवध और सीता हरण की लीला संपन्न हुई।
नाक-कान कटने के बाद सूर्पणखा लंका जाकर रावण को अपनी आप बीती सुनाते हुए खरदूषण के मरने की सूचना देती है। रावण मारीच को स्वर्ण मृग का रूप धारण कर वहां जाने को कहता है, ताकि वह सीता का अपहरण कर सके। मारीच रावण को समझाता है लेकिन क्रोधित रावण पर कोई प्रभाव नही पड़ता है। स्वर्ण मृग देख सीता श्रीराम से उसकी खाल लाने को कहती हैं। श्रीराम सीता की सुरक्षा लक्ष्मण को सौंप धनुष व बाण लेकर मृग मारीच के पीछे दौड़ पड़ते हैं।
देर होने पर लक्ष्मण वन के देवताओं से सीता की रक्षा करने को कह श्रीराम को खोजने चल देते हैं। उसी समय रावण संयासी का रूप धारण कर सीता के पास आता है और लक्ष्मण रेखा के बाहर आकर भिक्षा देने को कहता है। सीता के बाहर आते ही हरण कर आकाश मार्ग से चला जाता है। आकाश मार्ग में जटायु रावण को रोकता है। रावण तलवार से उसका पंख काट देता है।
जटायु श्रीराम का उद्घोष कर जमीन पर गिर पड़ता है। रावण सीता को राक्षसियों की सुरक्षा में अशोक वाटिका मे रखता है। दूसरी ओर श्रीराम लक्ष्मण को देख चिंतित होते हैं और कहते हैं कि राक्षसों के बीच सीता को वन में छोड़ आए। सीता आश्रम में नहीं हैं। हमने जानकी को वन मे खो दिया। लक्ष्मण श्रीराम से कहते हैं कि इसमें उनका कोई दोष नहीं है। वहीं चित्रकूट रामलीला में सबरी और हनुमान मिलन की झांकी सजाई गई।