फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काशी का लक्खा मेला: नाटी इमली का विश्व प्रसिद्ध भरत मिलाप में उमड़ा सैलाब, 478 साल से चली आ रही पंरपरा, देखें तस्वीरें

Sun, 17 Oct 2021 01:14 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
विज्ञापन
1 of 5
नाटी इमली का भरत मिलाप। - फोटो : अमर उजाला
परे भूमि नहिं उठत उठाए, बर करि कृपासिंधु उर लाए। स्यामल गात रोम भए ठाढ़े, नव राजीव नयन जल बाढ़े...। भरत जी पृथ्वी पर पड़े हैं। उठाए नहीं उठ रहे हैं। कृपासिंधु भगवान राम ने उन्हें जबरदस्ती उठाकर हृदय से लगा लिया। उनके सांवले शरीर के रोम-रोम खड़े हो गए। नवीन कमल के समान नयनों में प्रेम के आंसुओं की धार बह चली। भावपूर्ण दृश्य देखकर श्रद्धालुओं की आंखें भी झर-झर हो उठीं।

शनिवार को नाटी इमली के मैदान में श्री चित्रकूट रामलीला समिति की ओर से भरत मिलाप की 478 साल की परंपरा का निर्वहन किया गया। नाटी इमली का मैदान अयोध्या में तब्दील हो गया। जैसे ही राम और लक्ष्मण को भरत व शत्रुघभन ने देखा तो वह नंगे पैर ही उनकी ओर दौड़ पड़े। नेमियों ने प्रभु की राह में फूल बिछाए और मिलन की नयनाभिराम झांकी को आंखों में संजोने के लिए टकटकी लगा ली। शाम 04:40 बजे जैसे ही भगवान श्रीराम ने भरत को अपने गले से लगाया तो चारों दिशाओं में जय श्रीराम का जयघोष गूंज उठा। देखें अगली स्लाइड्स...
विज्ञापन

2 of 5
भरत मिलाप - फोटो : अमर उजाला
परंपरा के साक्षी बने नेमियों की आंखें चारों भाइयों के मिलन को देखकर सजल हो उठीं। काशी के लक्खा मेले में शुमार नाटी इमली के भरत मिलाप में आस्था और श्रद्धा का कोई ओर-छोर नहीं था। हर तरफ बस राम का नाम और उनके जयघोष। आसपास के मकानों की छतों पर श्रद्धालु टकटकी लगाए प्रभु श्रीराम की लीला का वंदन कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने चारों स्वरूपों का दर्शन कर आशीर्वाद लिया। स्वरूपों की आरती पं. अभिनव उपाध्याय ने उतारी।
विज्ञापन

3 of 5
बजरंगी लाए खबरिया, राम आए नगरिया
विश्व विख्यात नाटी इमली के भरत मिलाप में काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले चित्रकूट स्थल पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और माता-सीता के दर्शन किए। काशी की जनता ने हर-हर महादेव केजयघोष से उनका स्वागत किया। इसके बाद हनुमान जी ने चित्रकूट से अयोध्या के लिए प्रस्थान किया। वहां जाकर वह भरत जी को संदेश देते हैं कि भगवान राम अयोध्या की सीमा पर आ गए हैं। यह सुनते ही भरत जी हनुमान जी के साथ अयोध्या की सीमा पर आने की तैयारी शुरू कर देते हैं। भरत मिलाप मैदान में यह पहला मौका था जब काशीराज परिवार का कोई सदस्य वाहन से लीला स्थल पर पहुंचा था। इसके पहले काशीराज परिवार के सदस्य हाथी पर सवार होकर पहुंचते थे।

4 of 5
अनंत नारायण सिंह ने दी सोने की गिन्नी
भरत मिलाप के दौरान परंपरा का निर्वहन करते हुए काशीराज परिवार के अनंत नारायण सिंह ने सोने की गिन्नी दी। व्यवस्थापक पं. मुकुंद उपाध्याय ने बताया कि कुंवर ने हर साल की तरह परंपरा का निर्वहन करते हुए सोने की गिन्नी दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

नाटी इमली पर उमड़ी लोगों की भीड़
नाटी इमली मैदान में होने वाली लीला को देखने के लिए लोगों का रेला दोपहर से ही उमड़ पड़ा था। सुबह से ही लीला स्थल को सैनिटाइज करने की प्रक्रिया चलती रही। आसपास के घरों की छतों पैर भी लोगों की भीड़ लीला देखने के लिए खड़ी थी। वहीं नाटी इमली भरत मिलाप मैदान के आस पास मिट्टी के खिलौने, रेवड़ी चूड़ा, गुब्बारे और खाने की दुकानों से पूरा क्षेत्र गुलजार था। मेला क्षेत्र में चप्पे-चप्पे पर पुलिस फोर्स और यातायात विभाग के जवान तैनात थे। भरत मिलाप देखने वालों के लिए दो प्रवेश द्वार बनाए गए थे। मेला क्षेत्र में दो घंटा पहले ही वाहनों का प्रवेश बंद कर दिया गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें