जाने माने लेखक और नेहरू सेंटर लंदन के निदेशक अमीश त्रिपाठी ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही एक वैश्विक सॉफ्ट पावर था। हम उस स्थिति को दोबारा प्राप्त करने की राह पर अग्रसर हैं। भारत में ज्ञान और विज्ञान कभी भी एक दूसरे के विरोधी नहीं थे।
काशी तमिल संगमम के तहत मालवीय मूल्य अनुशीलन केंद्र में विद्यार्थियों से संवाद कर अमीश त्रिपाठी ने आधुनिक भारत के उदय पर अपने विचारों को साझा किया। आधुनिक भारत का उदय विषय पर कहा कि अज्ञान के अंधकार को सिर्फ ज्ञान ही दूर कर सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को अधिक से अधिक अध्ययन की सलाह दी। आईआईएम (कोलकाता) से पढ़े-लिखे बैंकर से लेखक बने अमीश त्रिपाठी ने वाराणसी और बीएचयू से अपने संबंधों की चर्चा की। बताया कि उनके दादा विश्वविद्यालय में अध्यापन करते थे, जबकि उनके पिता यहां के विद्यार्थी थे। कहा कि भारत की वृद्धि दर ने इस वर्ष ब्रिटेन को भी पीछे छोड़ दिया है और सकल घरेलू उत्पाद के मामले में भारत ने 150 वर्षों में जो गंवाया था, उसे महज पिछले 30 वर्षों ही पुन: प्राप्त कर लिया है। उन्होंने यह भरोसा जताया कि पिछले 900 वर्षों में भारत ने जो खोया है वह अगले 25 वर्षों में वापस अर्जित कर लिया जाएगा।
अमीश त्रिपाठी ने कहा कि हम उस परंपरा से आते हैं जहां हम दूसरों पर हमला नहीं करते हैं, इसलिए हम एक महाशक्ति नहीं बल्कि विश्व गुरु की तरह बर्ताव करेंगे। हमें भारत की जड़ों और प्राचीन विरासत को समझने की आवश्यकता है। हम हमेशा एक समृद्ध सभ्यता और सांस्कृतिक रूप से मजबूत राष्ट्र थे, जो विविधता से परिपूर्ण था। काशी तमिल संगम इसी का उत्सव है।
छात्रों के सवालों के दिए जवाब
छात्रों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि जब हम एक विश्व शक्ति बनने की राह पर आगे बढ़ रहे हैं, तो हमें अपने पूर्वजों की तीन प्रमुख सीखों का पालन करना होगा। इसमें दृढ़ता से अपनी रक्षा करना, आत्मविश्वास के साथ व्यापार करना और अपनी अर्थव्यवस्था को विकसित करना, अच्छी चीजों से सीखते रहना, चाहे वे कहीं से भी हों। इस दौरान लेखक के रूप में अमीश त्रिपाठी की यात्रा पर एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई। स्वागत दर्शन एवं धर्म विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद मिश्र, संचालन डॉ. धृति रे दलाई ने किया। इस दौरान प्रो. पतंजलि मिश्र, डॉ. उषा त्रिपाठी, प्रो. कृष्ण मोहन पांडेय लोग मौजूद रहे।
संकट मोचन महंत से मिले अमीश त्रिपाठी
वाराणसी। लेखक अमीश त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार को बीएचयू लक्ष्मण दास अतिथि गृह में संकट मोचन महंत प्रो. विश्वंभरनाथ मिश्र से मुलाकात की। करीब घंटे भर के मुलाकात के दौरान धर्म और युवा पीढ़ी से संबंधित विषय पर विचार विमर्श किया। महंत ने बताया कि अमीश त्रिपाठी अगली पीढ़ी को किताबों की ओर वापस खींचने में कामयाब हुए हैं। कहा कि युवाओं को परंपरा को जोड़े रखने में धर्म बेहतर कड़ी है। अमीश त्रिपाठी ने संकट मोचन महंत को दूसरे देशों में भी अपने फॉलोवरों से जुड़ने का आग्रह किया। इस दौरान बदलते बनारस के नकारात्मक और सकारात्मक पहलू पर चर्चा हुई। इससे पूर्व अमीश त्रिपाठी ने बृहस्पतिवार की सुबह ए बनारस भ्रमण के संसमरण बताए। अस्सी से काशी विश्वनाथ धाम तक का पैदल भ्रमण किया।