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खरमास समाप्त, 17 से गूंजेगी शहनाई

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भगवान सूर्य के राशि परिवर्तन के बाद 17 अप्रैल से शादियों का दौर शुरू हो जाएगा। अगले चार महीनों में विवाह के लिए कुल 33 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं। सतुआ संक्रांति पर खरमास के समापन के साथ ही विवाह, देव प्रतिष्ठा, नूतन गृह निर्माण, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य शुरू हो गए हैं। साल के बीच में देवशयनी एकादशी 10 जुलाई से चतुर्मास शुरू होते ही चार माह के लिए शुभ काम फिर रुक जाएंगे।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश मिश्र बताते हैं कि अब ग्रहों के राजा सूर्य राशि बदलकर मेष में आ गए हैं। जिससे खरमास खत्म हो गया है। अब देवगुरु बृहस्पति भी अपनी राशि मीन में रहेंगे और सूर्य का उच्च राशि में भ्रमण होने से विवाह कार्य में वर-वधु की पत्रिका में सूर्य और गुरु की शुभ स्थिति देखते हुए विवाह मुहूर्त निकाले जाएंगे। इस अवधि में चंद्रबल को देखकर शुभ लग्न की तारीखें तय की जाएंगी।
पहला विवाह मुहूर्त 17 अप्रैल को
इस महीने 17 अप्रैल, रविवार को स्वाति नक्षत्र और प्रतिपदा तिथि पर विवाह का पहला मुहूर्त रहेगा। वहीं, 28 को महीने का आखिरी विवाह लग्न रहेगा। इसके बाद मई में शादियों के लिए सबसे ज्यादा 13 दिन मिलेंगे। वहीं, जून में 10 विवाह मुहूर्त रहेंगे। जुलाई और नवंबर में चार-चार और दिसंबर में शादियों के लिए पांच दिन शुभ रहेंगे।
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जुलाई तक कुल 33 विवाह मुहूर्त
अप्रैल- 17, 19, 21, 22, 23 और 28
मई- 2, 3, 9, 10, 11, 12, 13, 17, 18, 20, 25, 26 और 31
जून- 6, 8, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 21 और 22
जुलाई- 3, 5, 6 और 8
बुधादित्य योग के साथ ग्रहण दोष भी
डॉ. मिश्र ने बताया कि 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में प्रवेश करते ही वहां पर पूर्व से ही स्थित बुध और राहु के साथ सूर्य की युति बनेगी। सूर्य और बुध की युति के कारण बुधादित्य योग रहेगा। लेकिन सूर्य-राहु की युति के कारण ग्रहण दोष भी लग रहा है। जिसके फलस्वरूप शासक वर्ग के लिए यह समय शुभ नहीं कहा जा सकता है। सूर्य-राहु की युति होने के कारण सत्ता पक्ष को गुप्त शत्रु हानि पहुंचाने की कोशिश करेंगे या सत्ता पक्ष में किसी प्रमुख व्यक्ति को शारीरिक कष्ट की आशंका भी रहेगी।
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