इसमें विनायक, शिवगण, राम दरबार, सत्यनारायण, मां अन्नपूर्णा, शनिदेव, हनुमान यक्ष, भैरव और भगवान शिव के प्रतिष्ठित मंदिर थे। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि मणिमाला की डिजाइन तैयार हो चुकी है। निर्माण कार्य भी जल्द आरंभ हो जाएगा। नवंबर तक काशी विश्वनाथ धाम का काम पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल 75 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है।
मणिमाला के मंदिर सुनाएंगे अपनी कहानी
मणिमाला के मंदिर अपनी कहानी श्रद्धालुओं को सुनाएंगे। पुरातन मंदिरों का इतिहास बताने के लिए एप्लीकेशन तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कॉरिडोर में बने मंदिरों के नजदीक आते ही उस मंदिर का इतिहास ऑडियो के जरिए सुनाई देगा। डिजिटली जागरूक नहीं रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए मैनुअल सिस्टम भी रखा जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के शुभारंभ के साथ ही यह एप्लीकेशन भी लांच कर दिया जाएगा।
बाबा के दर्शन के साथ ही होंगे शिव कचहरी के दर्शन
शिव भक्तों को अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ ही शिव कचहरी के दर्शन भी होंगे। शिव कचहरी समेत आसपास के सभी मंदिर अब बाबा दरबार का ही हिस्सा होंगे। काशी विश्वनाथ के बगल में पहले से स्थापित शिव कचहरी की अपनी अलग मान्यता है। यहां अनगिनत शिवलिंग के अलावा सभी देवताओं के विग्रह स्थापित होंगे।