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काशी विश्वनाथ धाम: काशीपुराधिपति के साथ विराजेंगे विग्रह, मणिमाला की डिजाइन तैयार, परिसर से जुड़ेंगे 27 मंदिर

Tue, 05 Oct 2021 09:50 AM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ धाम। - फोटो : अमर उजाला
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काशी विश्वनाथ धाम को भव्य स्वरूप देने के साथ ही हटाए गए विग्रहों को उनके स्थान पर स्थापित किया जाएगा। श्रद्धालुओं को मंदिरों की मणिमाला के नए स्वरूप के दर्शन होंगे। काशीपुराधिपति के भव्यतम दरबार में महादेव के साथ उनके विग्रह भी अब नए सिरे से स्थापित किए जाएंगे। मोद, प्रमोद, आमोद विनायक के साथ ही शिवालयों की अपनी अलग शृंखला होगी।

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खास बात यह है कि मंदिरों की मणिमाला में सभी विग्रहों के अपने स्थान होंगे। विनायक एक ही परिसर में भक्तों को दर्शन देंगे, वहीं नीलकंठ महादेव का मंदिर भी अपने प्राचीन वैभव के साथ स्थापित होगा। ललिता घाट से बाबा दरबार आने वाले भक्तों को मणिमाला की परिक्रमा और दर्शन का लाभ मिलेगा।

कार्यदायी एजेंसी की ओर से मणिमाला के लिए 27 मंदिरों का निर्माण किया जाएगा। सरस्वती फाटक से इसका श्रीगणेश होगा और बाबा दरबार तक के सभी विग्रह अपने स्थान पर पुनर्प्रतिष्ठित होंगे। काशी विश्वनाथ धाम के निर्माण के लिए ध्वस्तीकरण के दौरान मंदिर निकले थे।

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नवंबर तक काशी विश्वनाथ धाम का काम होगा पूरा

इसमें विनायक, शिवगण, राम दरबार, सत्यनारायण, मां अन्नपूर्णा, शनिदेव, हनुमान यक्ष, भैरव और भगवान शिव के प्रतिष्ठित मंदिर थे। मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने बताया कि मणिमाला की डिजाइन तैयार हो चुकी है। निर्माण कार्य भी जल्द आरंभ हो जाएगा। नवंबर तक काशी विश्वनाथ धाम का काम पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल 75 फीसदी से अधिक काम पूरा हो चुका है।
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मणिमाला के मंदिर सुनाएंगे अपनी कहानी
मणिमाला के मंदिर अपनी कहानी श्रद्धालुओं को सुनाएंगे। पुरातन मंदिरों का इतिहास बताने के लिए एप्लीकेशन तैयार किया गया है। इसके माध्यम से कॉरिडोर में बने मंदिरों के नजदीक आते ही उस मंदिर का इतिहास ऑडियो के जरिए सुनाई देगा। डिजिटली जागरूक नहीं रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए मैनुअल सिस्टम भी रखा जाएगा। काशी विश्वनाथ धाम परियोजना के शुभारंभ के साथ ही यह एप्लीकेशन भी लांच कर दिया जाएगा। 

बाबा के दर्शन के साथ ही होंगे शिव कचहरी के दर्शन
शिव भक्तों को अब बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ ही शिव कचहरी के दर्शन भी होंगे। शिव कचहरी समेत आसपास के सभी मंदिर अब बाबा दरबार का ही हिस्सा होंगे। काशी विश्वनाथ के बगल में पहले से स्थापित शिव कचहरी की अपनी अलग मान्यता है। यहां अनगिनत शिवलिंग के अलावा सभी देवताओं के विग्रह स्थापित होंगे।
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