इसके साथ ही पर्यटन सुविधा केंद्र, टिकट बूथ, कैफेटेरिया, पब्लिक प्रोमिनार्ड वॉल आर्ट व म्यूरल, सेल्फी पॉइंट, योग व मेडिटेशन केंद्र का भी निर्माण हो रहा है। आईओएफ (इंडियन ऑयल फाउंडेशन) ने सीएसआर के तहत करीब आधा दर्जन कार्य शुरू कराए हैं।
मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल ने कहा कि घाट को पक्का करने के साथ पर्यटक सुविधाओं को नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसी दौरान नावों को सीएनजी में तब्दील कराया जा रहा है। देव दीपावली से पहले खिड़किया घाट प्रमुख केंद्र के रूप में सामने होगा।
गंगा में डीजल और पेट्रोल से संचालित होने वाली नाव पर रोक लगाने से पहले नगर निगम से पंजीकृत बोट को सीएनजी आधारित किया जा रहा है। गंगा घाट पर बने पहले सीएनजी पंप से ही उन्हें ईंधन की आपूर्ति की जाएगी। गंगा में करीब दो हजार नावों का संचालन होता है। इसमें 918 नावें नगर निगम में पंजीकृत हैं। इसमें 166 नावों को इंजन लगाकर सीएनजी आधारित किया गया है। स्मार्ट सिटी योजना के तहत पहले चरण में 1200 नावों को पंजीकृत कर नवंबर तक सीएनजी लगाने का लक्ष्य रखा है।
खिड़किया घाट में सीएनजी नौका संचालन के बाद दूसरे चरण का काम शुरू कराया जाएगा। इसमें हेलीपैड निर्माण, पार्किंग, भैसासुर घाट से खिड़किया घाट तक लिंक रोड, फसाड डेवलपमेंट सहित आधा दर्जन कार्य अगले वर्ष मार्च तक पूरे हो जाएंगे।
गंगा में डिवाइडर से बनाई जाएगी लेन
गंगा में बढ़ रहे बड़े और छोटे नाव, बोट और क्रूज के सुरक्षित संचालन के लिए डिवाइडर बनाए जाने की तैयारी है। इसमें अस्सी से खिड़किया घाट के बीच बनने वाली लेन में आने और जाने के मार्ग अलग-अलग होंगे। खिड़किया घाट पर ही जलपुलिस की एक चौकी बनाई जाएगी और यहां से गंगा में ट्रैफिक की निगरानी भी कराई जाएगी।