प्रदोष काल व्यापिनी अष्टमी को जीमूत वाहन का पूजन होता है। इस व्रत के लिए यह भी आवश्यक है कि पूर्वाह्न काल में पारण के लिए नवमी तिथि प्राप्त हो। बीएचयू संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस वर्ष अष्टमी 29 सितंबर को दिन में 4.55 बजे तक है।
इसलिए पूर्व दिन सप्तमी को प्रदोष व्यापिनी अष्टमी में व्रत करने पर पारण करने के लिए दूसरे दिन पूर्वाह्न में नवमी प्राप्त नहीं हो रही है। अत: उदया अष्टमी बुधवार को उपवास पूर्वक प्रदोष काल में ही जीमूतवाहन की पूजा करके नवमी में बृहस्पतिवार को सुबह पारण करना चाहिए। इसलिए 29 सितंबर को जीवत्पुत्रिका का उपवास तथा प्रदोष काल में (शाम 4.28 से रात्रि 7.32तक) पूजन होगा। 30 सितंबर गुरुवार को व्रत का पारण होगा।