गांव के कई टोलों के लगभग 300 से भी ज्यादा आलीशान मकान वर्ष 2014 में ही घाघरा में समा गए। उसी गांव के दलेल टोला में है कारगिल शहीद अवनीश कुमार यादव का घर। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान, कई दुश्मनों को मार गिराने के बाद वह खुद भी दुश्मनों की गोलियों का निशाना बन गए थे। शहीद अवनीश कुमार यादव के परिजन आज भी उस दिन को याद करके रो पड़ते हैं।
देश के लिए अपने बेटे को कुर्बान करने वाले माता-पिता तब से ही शहीद की एक प्रतिमा और उसके नाम पर एक प्रवेश द्वार की मांग करते रह गए, लेकिन उनकी मुराद आज तक पूरी नहीं हुई। बहुत से रहनुमाओं ने शहीद के नाम पर बहुत कुछ करने को कहा था, लेकिन समय के सांथ सब कुछ ओझल हो गया।
शहीद के माता-पिता आज भी उसी आस में अपनी बची हुई जिंदगी काट रहे हैं। अमर शहीद अवनीश यादव के परिजनों ने जब योगी सरकार की इस घोषणा को सुना था तब वे काफी खुश हुए थे। शहीद अवनीश की माता सोमारो देवी, भाई रविंद्र यादव, योगेंद्र यादव आदि ने भी खुशी का इजहार किया था लेकिन उस घोषणा के बाद भी आज तक किसी ने कोई खोज-खबर नहीं ली।