अदालत से बाहर आते शहर उत्तरी के भाजपा विधायक रवींद्र जायसवाल
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वाराणसी फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम शैली राय की अदालत ने करीब 17 साल पुराने बहुचर्चित अशरफ अपहरण कांड में शनिवार को फैसला सुनाया। भेलूपुर निवासी युवक अशरफ का अपहरण कर उसे गायब कर देने के अभियोग में इंस्पेक्टर भृगुनाथ मिश्र और दरोगा धर्मनाथ को दस वर्ष की कड़ी कैद और 14 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
इसी मामले में साजिश के आरोपी शहर उत्तरी के भाजपा विधायक रवींद्र जायसवाल और उनके गनर राजनाथ भारती को आरोप साबित न होने पर साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। मूलत: बिहार के सेमरी, बक्सर निवासी भृगुनाथ की मौजूदा समय तैनाती चंदौली में थी जबकि सोहनपुर देवरिया निवासी धर्मनाथ की तैनाती इलाहाबाद में। फैसला आने के साथ ही दोनों को कोर्ट से ही कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया।
अभियोजन के मुताबिक नवाबगंज निवासी अशरफ के खिलाफ भेलूपुर थाने में 504, 506 का मुकदमा वर्ष 2000 में पंजीकृत था। आरोपी अशरफ की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन चौकी इंचार्ज धर्मनाथ और दरोगा भृगुनाथ मिश्र अजमेर शरीफ गए।
27 मार्च 2000 को अजमेर शरीफ से अशरफ को गिरफ्तार कर ट्रेन से वाराणसी लाया जा रहा था। आरोप है की इस दौरान आरोपी अशरफ उनकी अभिरक्षा से भाग गया। धर्मनाथ ने आरोपी के भागने की प्राथमिकी जीआरपी में दर्ज कराई।
जबकि अशरफ के पिता वादी हफीजुल्लाह ने एसएसपी को आवेदन देकर आरोप लगाया कि उसके पुत्र की अपहरण कर हत्या कर दी गई और शव गायब कर दिया गया। साथ ही, तत्कालीन भाजपा नेता एवं मौजूदा विधायक रवींद्र जायसवाल एवं उनके गनर राजनाथ पर इस वारदात की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
विधायक पर अशरफ से पुरानी रंजिश का आरोप था। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी ने की थी। कोर्ट में विचारण के दौरान 12 गवाह पेश किए गए।