वाराणसी शहर में पेयजल, सीवर और सफाई से जुड़ी जनशिकायतों की निगरानी अब सीधे मजिस्ट्रेट करेंगे। जलकल के सभी 11 जोन में इसके लिए मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में टीम बनाई जाएगी। जलसंस्थान, जलनिगम, नगर निगम के जोनल अधिकारी, सफाई सुपरवाइजर इन टीमों में शामिल होंगे।
मजिस्ट्रेट की निगरानी में टीम की जिम्मेदारी होगी कि वह अपने-अपने क्षेत्र में पेयजल, सीवर और सफाई से जुड़ी जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान कराए। इसके लिए जगह-जगह कैंप लगाए। साथ ही, मौके पर जाकर जनता की समस्याएं सुने।
इसके लिए सूबे के विधि, न्याय, सूचना, खेल एवं युवा कल्याण राज्य मंत्री डॉ. नीलकंठ तिवारी ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है। शनिवार को पेयजल, सीवर एवं सफाई व्यवस्था सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं पर उन्होंने कमिश्नरी सभागार में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
अफसरों से दो टूक कहा कि दफ्तरों में नियमित जनता की शिकायतें सुनें। साथ ही, लोगों के बीच भी जाएं। समस्याओं का त्वरित निराकरण कराएं। कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण, डीएम योगेश्वर राम मिश्र, नगर निगम, जलसंस्थान, गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई एवं जलनिगम के अधिकारी बैठक में शामिल थे।
गलियों में सीवर ओवरफ्लो पर जताई चिंता
मंत्री ने गलियों में सीवर ओवरफ्लो और दूषित पेयजलापूर्ति पर गहरी चिंता जताई। कहा, सीएम योगी आदित्यनाथ काशी पर सीधी नजर रख रहे हैं। किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधितों को उसका खामियाजा भुगतना होगा।
कैंट से विधायक सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि सीवर सफाई का काम जब से जलसंस्थान को दिया गया है, तब से सीवर से जुड़ी समस्याएं बढ़ती गईं। इस पर डीएम ने सीवर सफाई कार्य में लगे ठेकेदारों की मंगलवार को बैठक बुलाने के निर्देश दिए।
कहा कि ठेकेदारों को एक सप्ताह की मोहलत दी जाएगी। सुधार न हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी। बड़ी गैबी में नवनिर्मित ओवरहेड टंकी से जुड़े विवाद का फोर्स भेजकर निबटारा कराने की ताकीद की।
ट्रांस वरुणा के तहत डब्लूटीपी बनाए जाने के बारे में बताया कि 17 एकड़ के प्लाट में मात्र दो एकड़ पर ही विवाद है। लेकिन विभागीय अधिकारियों ने विवाद का हल निकालने के लिए व्यक्तिगत रुचि नहीं ली।