काशी में गंगा के किनारे बच्चों में गंगा के प्रति जागरूकता का संस्कार डाला जा रहा है। ईको स्किल्ड गंगा मित्र और जल संरक्षकों की टीम सामनेघाट से राजघाट तक गंगा के प्रति जागरूकता की मुहिम चला रही है।
नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा के तहत प्रशिक्षित 400 गंगा मित्र और 15 हजार जल संरक्षकों की टीम नियमित रूप से इस काम में लगी है। वर्षा जल संचयन के साथ ही उसके उपयोग के बारे में भी ईको स्किल्ड गंगा मित्र आम लोगों को जागरूक कर रहे हैं।
बीएचयू के महामना मालवीय गंगा शोध केंद्र की ओर से गंगा मित्रों की फौज तैयार की जा रही है। शोध केंद्र ने एक साल के अंदर 400 ईको स्किल्ड गंगा मित्रों की टीम तैयार की है। गंगा मित्रों ने वाराणसी में गंगा बेसिन के गांव तथा घाटों के आसपास 15 हजार जलसंरक्षकों को जोड़ा है। शाम होते ही यह गंगा मित्र गंगा के घाटों पर गंगा पाठशाला चलाते हैं। इसमें घाट के अगल-बगल के स्कूलों के बच्चे और घाट पर टहलने वालों को गंगा संरक्षण का पाठ पढ़ाया जाता है।
गंगा मित्र उन्हें यह बताते हैं कि वह ऐसा क्या करें जिससे कि गंगा में प्रदूषण न हो। गंगा के आसपास के गांवों में सूख चुके तालाब, कुआं और हैंडपंप को फिर से रिचार्ज करने के बारे में तकनीकी जानकारी भी दी जाती है। इसके लिए बरसात के पानी का संरक्षण और उसके उपयोग के बारे में वैज्ञानिक ढंग से गंगा मित्र और जल संरक्षक जानकारी देते हैं। साथ ही नियमित सफाई अभियान चलाकर गंगा सफाई के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
2525 किलोमीटर के गंगा बेसिन में तैनात होंगे गंगा मित्र
गंगा शोध केंद्र के चेयरमैन और नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने बताया कि काशी से अभी तो इसकी शुरुआत है। गंगा बेसिन के 2525 किलोमीटर के सभी प्रमुख शहरों में गंगा मित्र और जल संरक्षकों की टीम तैयार होगी। वाराणसी में हमने जिला गंगा कमेटी के अध्यक्ष जिलाधिकारी को 200 ईको स्किल्ड गंगा मित्रों की सूची सौंपी है। हमने पत्र में लिखा है कि गंगा के संरक्षण के लिए वह इन प्रशिक्षित गंगा मित्रों को आवश्यकतानुसार कहीं भी तैनात कर सकते हैं।