चौबेपुर निवासी जगरनाथ प्रसाद उर्फ जगई कन्नौजिया (87) ने कहा कि ब्रिटिश सरकार में काफी शोषण था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के चलते हमें स्वतंत्रता मिली है। 1947 में प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था। गांव में लाल पगड़ी देखकर लोग भाग जाते थे। उस समय कादीपुर रेलवे स्टेशन पर चक्काजाम किया गया था। अब देश अंग्रेजों के चंगुल से मुक्त हो गया है। आज लगता है कि सपना पूरा हो गया है। पहले दो जून की रोटी नसीब नहीं होती थी। अब खाने की कोई कमी नहीं है। तीन लड़के हैं, एक फौज में है। एक पुलिस और एक व्यापारी है।
चौबेपुर के ही राम जी मोदनवाल (86) ने कहा कि आजादी के बाद काफी कुछ बदल गया। पिता स्व. गंगाराम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। मेरे घर में आंदोलन की रणनीति तैयार होती थी। बर्थरा कला के बजरंगी यादव और चुकहां के श्यामाचरण पांडेय व मेरे पिता आपस में बैठकर रूपरेखा बनाते थे। उन लोगों ने आजादी के पहले कादीपुर रेलवे स्टेशन फूंका था। पहले खाने, रहने, शिक्षा, सड़क, साधन सबका अभाव था। आजादी के बाद इससे मुक्ति मिली है। पहले से देश ने काफी तरक्की की है।