लेखक, निर्देशक इम्तियाज अली ने साझा की भविष्य की योजनाएं
- फोटो : अमर उजाला
सोचा भी न था, जब वी मेट, लव आज कल, तमाशा, रॉकस्टार, हाईवे फिल्म बनाने वाले लेखक-निर्देशक इम्तियाज अली कहते हैं कि जमशेदपुर और पटना का होने के बाद भी खुद अचंभित हूं कि अभी तक मैंने भोजपुरी बोलने वाले क्षेत्र के किसी प्लॉट पर फिल्म क्यों नहीं बनाई।
उन्होंने कहा अभी मैं तीन कहानियों पर काम कर रहा हूं। इसके बाद मेरा मन अपने क्षेत्र की कहानी पर काम करने का है। वह जोड़ते हैं-शायद इसलिए भी अभी तक काम नहीं कर पाया कि यहां के पात्रों की ‘भइया’ वाली छवि है लेकिन मैं इसे खुद मुंबई में गलत साबित कर रहा हूं।
अब अपनी फिल्म के माध्यम से भी करूंगा। मेरी कोशिश रहेगी कि मैं कुछ अलग तस्वीर पेश कर सकूं। वाराणसी को फिल्म ‘जब हैरी मेट सेजल’ के प्रमोशन के लिए चुनने को वह इसकी शुरूआत मानते हैं।
इम्तियाज बताते हैं कि उन्होंने ‘कला’ या यूं कहें ‘इंटरटेनमेंट’ का सफर थियेटर से शुरू किया। पढ़ता भी खूब हूं, चूंकि मैंने 11 साल के फिल्म कैरियर में कई स्तरीय फिल्में बनाईं, जिसमें मीनिंग टच आर्ट फिल्म तमाशा भी थी।
कई अवार्ड लिए हैं तो लोग मुझसे सवाल करते हैं कि आखिर मैं अभी भी ऐसी लव स्टोरी क्यों बना रहा हूं। बताते हैं-असल में मुझे लगता है कि अगर आप में कुछ खास तरीके से बात कहने का सलीका है तो एक ही तरीके से बन रहीं लव स्टोरी में भी जान डाली जा सकती है।
वह कहते हैं कि मैं कबीर जैसी बानी बोलना चाहता हूं, जो सबको आसानी से समझ में आ जाए। इसीलिए अब आर्ट फिल्मों की ओर खास रुझान नहीं है। जब खुद के लिए काम करूंगा, ऐसी कहानी भी लिखने का प्रयास करूंगा।
ज्यादातर खुद की लिखी कहानी पर ही काम करने के बारे में इम्तियाज ने बताया कि इससे निर्देशन पर मेरी पकड़ कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए मैं खुद के लेखन पर काम करना अधिक पसंद करता हूं।