बताया कि यह अध्ययन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अब तक इस तरह के सभी मामलों में सर्जरी की जाती थी, लेकिन यह शोध विशेष मामलों में वैकल्पिक इलाज सुझाता है।
प्रो. सिद्धार्थ लखोटिया ने बताया कि थोरेसिक एमपाइमा छाती के अंदर पस यानी मवाद इकट्ठा होने की स्थिति को कहते हैं। ऐसा होने पर चिकित्सकीय उपचार की आवश्यकता होती है और स्थिति गंभीर हो तो, सर्जरी करनी पड़ती है।
इस अध्ययन में एमपाइमा से पीड़ित मरीजों पर सर्जरी के परिणामों और सर्जरी से पहले उनके विभिन्न पैरामीटर (मानक) का तुलनात्मक अध्ययन किया गया। ताकि पता लगाया जा सके कि जिन मामलों में सर्जरी लाभकारी नहीं है, उनके लिए पहले ही वैकल्पिक इलाज सुझाया जा सके।