देश के अन्य भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान अब आईआईटी बीएचयू की राह पर चलेंगे। आईआईटी बीएचयू में 28 जुलाई से चल रहे इंडक्शन प्रोग्राम को दूसरे आईआईटी भी कराएंगे। वर्तमान सत्र में आईआईटी बीएचयू ने तीन सप्ताह का इंडक्शन प्रोग्राम शुरू किया है, जिसमें छात्र-छात्राओं को तनावमुक्त करते हुए उन्हें मानवीय मूल्यों का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इंजीनियरिंग से इतर खेलकूद, साहित्य, कला और रचनात्मकता से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
पहली बार आईआईटी बीएचयू में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के लिए तीन हफ्ते का इंडक्शन प्रोग्राम इस उद्देश्य से शुरू किया गया है कि ये यहां के माहौल में घुल मिल सकें। तीनों हफ्ते क्लास के लेक्चर, फार्मूले, इक्वेशन से दूर रहना है। प्रोग्राम के जरिये वो न सिर्फ अपने कैंपस, अपनी यूनिवर्सिटी को जान रहे हैं बल्कि इस शहर के मिजाज, इतिहास से परिचित हो रहे हैं। आईआईटी बीएचयू में शुरू इस प्रोग्राम को न सिर्फ छात्र पसंद कर रहे हैं, बल्कि दूसरे आईआईटी भी इसे सराह रहे हैं।
खास बात यह कि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने इसकी रिपोर्ट को प्रस्तुत करने को कहा है। 20 अगस्त को इस इंडक्शन प्रोग्राम के समाप्त होने के बाद आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल 23 अगस्त को मंत्रालय को रिपोर्ट पेश करेंगे। उधर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी इसे इस प्रोग्राम को सिर्फ आईआईटी तक ही नहीं बल्कि दूसरे केंद्रीय विश्वविद्यालय में शुरू कराने का प्रस्ताव रखा है।
आईआईटी बीएचयू के निदेशक प्रो. राजीव संगल ने कहा कि प्रोग्राम के जरिए विद्यार्थियों को संपूर्णता और उत्सवपूर्वक जीना सिखा रहे हैं। पढ़ाई के अलावा परिवार, समाज के प्रति जिम्मेदारियां क्या है, इसका भी बोध कराया जा रहा है। विद्यार्थियों को अध्यापकों से जोड़ने की भी कोशिश की जा रही है।
केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के हेड प्रो. पीके मिश्रा ने कहा कि प्रोग्राम को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहला मानवीय मूल्य, दूसरा क्रिएटिव प्रैक्टिस और तीसरा संस्थान, विश्वविद्यालय और शहर का परिचय। सुबह योग और खेलकूद के साथ उन्हें पेंटिंग, डांसिंग, क्ले मॉडलिंग के जरिए कौशल भी विकसित किया जा रहा है।