छावनी क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने गई टीम का भारी विरोध
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वाराणसी के कैंट स्टेशन स्थित द्वितीय प्रवेश द्वार के विस्तारीकरण में बाधक बन रहे छावनी क्षेत्र के कुछ मकान और अवैध दुकानों को तोड़ने गई रेलवे के बुलडोजर दस्ते को शनिवार को भारी विरोध के चलते पीछे हटना पड़ा। चार जेसीबी और कैंट थाने की फोर्स, आरपीएफ-जीआरपी की मौजूदगी में छावनी के रहवासियों ने अतिक्रमण अभियान का विरोध किया।
इस दौरान कैंट विधायक, जिला प्रशासन और रेल अधिकारियों के बीच कई चक्र में हुई वार्ता के बाद रहवासियों को 48 घंटे की मोहलत देते हुए मकान और दुकान खाली करने का आदेश दिया गया। रेल अधिकारियों के अनुसार, सात दिन पहले ही पांच मकान और अवैध तरीके से दुकान लगाए लोगों को नोटिस दिया गया था।
छावनी क्षेत्र स्थित कैंट स्टेशन के द्वितीय प्रवेश द्वार की ओर तीसरे फुट ओवर ब्रिज का निर्माण होना है, इसके लिए जगह भी चिन्हित की गई है। उत्तर रेलवे के अधिकारियों ने छावनी बोर्ड से सहमति लेते हुए विस्तारीकरण में आड़े आ रहे पांच मकान और अवैध तरीके से दुकान लगाने वालों को अतिक्रमण अभियान का हवाला देते हुए जगह खाली करने के लिए सप्ताह पूर्व नोटिस थमाया था। शनिवार को सुबह जब रेलवे का बुलडोजर दस्ता और भारी बल पहुंचा तो महिलाएं और बच्चे जेसीबी के सामने लेट गए। कुछ लोगों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया।
लोग बोले- 40 साल से दे रहे हैं टैक्स, नहीं मिला नोटिस
स्थानीय लोगों ने दावा किया कि 40 वर्षों से अपना जीवन यापन कर रहे हैं। छावनी बोर्ड को पानी, सीवर का टैक्स देते हैं। निर्धारित किराए का भुगतान भी किया जाता है। प्रदर्शन के दौरान नाटी विलियम, किशन पाल, उपेंद्र कुमार, केशव सिंह, रामश्रय सोनकर, राजेंद्र प्रसाद, प्रमोद कुमार गुप्ता, रामअचल पाल ने कहा कि कोई नोटिस नहीं मिला। मकान ढहा दिया जाएगा तो हम कहां रहेंगे। इसी बीच कैंट विधायक सौरभ श्रीवास्तव के पास कुछ लोग विरोध जताने पहुंचे।