ज्ञानवापी परिसर का सर्वे करती एएसआई की टीम
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एएसआई की ओर से भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अमित कुमार श्रीवास्तव व उनके सहयोगी शंभू शरण सिंह ने दलील दी कि ज्ञानवापी में सर्वे और जांच के दौरान यह पाया गया कि बहुत सारा कचरा, मिट्टी, ईंट-पत्थर सहित अन्य प्रकार की सामग्रियां मौजूदा संरचना के चारों तरफ और तहखाने में फेंकी हुई हैं। अदालत ने सभी तहखानों की जमीन के नीचे सर्वेक्षण करने का निर्देश दिया है, इसलिए यह आवश्यक है कि मौजूदा ढांचे को कोई नुकसान पहुंचाए बिना मिट्टी और मलबे को हटाया जाए।
मलबे को बहुत सावधानी से और व्यवस्थित रूप से हटाया जा रहा है, जो एक धीमी प्रक्रिया है। अदालत के निर्देशानुसार सर्वे के लिए तहखानों की जमीन और मौजूदा संरचना की संरचनात्मक विशेषताओं को साफ करने से पहले कुछ और समय लगने वाला है। रुक-रुक कर हो रही बारिश से भी काम प्रभावित और धीमा हो गया है, जिसके कारण वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग मुश्किल हो गया है।
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी ने एएसआई की अर्जी पर मौखिक आपत्ति दर्ज कराई। अधिवक्ता मुमताज अहमद ने कहा कि अदालत ने जैसा निर्देश दिया था, एएसआई की ओर से वैसा सर्वे कार्य नहीं किया जा रहा है। तहखानों से मलबा हटाने का निर्देश नहीं दिया गया था। एएसआई अपना समय बर्बाद कर रहा है। समय को चार सप्ताह से अधिक नहीं बढ़ाया जाना चाहिए।