ज्ञानवापी केस से संबंधित लॉर्ड विश्वेश्वर मूल वाद में सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी में बचे हिस्से के एएसआई सर्वे की अर्जी के समर्थन में दलीलें दी गईं। अब इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 18 सितंबर की पड़ी है।
सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) युगल शंभू की अदालत में ज्ञानवापी से जुड़े वर्ष 1991 के लॉर्ड विश्वेश्वर मूल वाद में सुनवाई हुई। वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी ने ज्ञानवापी में बचे हिस्से के एएसआई सर्वे की अर्जी के समर्थन में दलीलें दीं। सुनवाई की अगली तिथि 18 सितंबर को प्रतिवादी अंजुमन इंतजामिया अपना पक्ष रखेंगे।
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वाद मित्र ने कहा कि एएसआई की अब तक जीपीआर सर्वे में केवल तीन लेयर की जांच हुई है, लेकिन जो हिस्सा मलबे से पाटा गया है, वहां तक सिग्नल नहीं मिल पाया है। इसका भी जिक्र रिपोर्ट में किया गया है। ऐसे में एएसआई द्वारा 100 फीट लंबे ज्योतिर्लिंग का सर्वे कराया जाए।
बिना क्षति के वर्तमान ढांचे के 100 फीट आगे या अगल-बगल 4 गुणे 4 मीटर का गड्ढा खोदकर अरघा के तल तक पहुंचा जाए। इसके बाद ही सच्चाई का पता चल सकेगा। वाद मित्र की बहस पूरी हो गई है। अर्जी में अंजुमन इंतेजामिया, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, प्रदेश सरकार व विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को बनाया गया है।