वहां साक्षियों के बयान के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट ने रिपोर्ट मंगाई थी, जबकि यहां के मामले में अभी तक किसी का साक्ष्य हुआ ही नहीं है। ऐसे में साक्ष्य आने के बाद विरोधाभास होने पर कोर्ट रिपोर्ट मंगा सकती है। दलील दी गई कि साक्ष्य एकत्र करने के लिए रिपोर्ट नही मंगाई जा सकती है। यह भी कहा गया कि विवादित ढांचा खोदे जाने से शांतिभंग भी हो सकती है, ऐसे में कोर्ट का दायित्व है कि वहां शांति बनी रहे। अदालत में अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की तरफ से रईस अहमद खान, अफताब अहमद, मुमताज अहमद और सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की तरफ से तौफीक खान ने भी दलीलें पेश की थीं।