Varanasi News: अदालत ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद आदेश में कहा कि वाद पत्र प्रारंभिक स्तर पर है। जहां तक मसाजिद कमेटी की तरफ से दाखिल विधि व्यवस्थाओं का प्रश्न है, उसके तथ्य व परिस्थितियां भिन्न हैं। उसका लाभ इस वाद में नहीं दिया जा सकता।
सिविल जज सीनियर डिवीजन हितेश अग्रवाल की अदालत ने ज्ञानवापी परिसर स्थित आदि विश्वेश्वर के पूजा-पाठ और राग-भोग के लिए दाखिल अर्जेंट वाद की पोषणीयता को लेकर दाखिल अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के आवेदन को खारिज कर दिया। अदालत अब इस वाद पर 20 मई को सुनवाई करेगी।
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अदालत ने मसाजिद कमेटी की इस दलील को खारिज कर दिया कि यह वाद विशेष पूजा स्थल अधिनियम से बाधित है। मसाजिद कमेटी की तरफ से कहा गया कि ज्ञानवापी के आराजी नंबर 9130 पर सैकड़ों वर्ष से आलमगीरी मस्जिद है। वह वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। वहां कभी आदि विश्वेश्वर की पूजा-पाठ नहीं होती थी।
वादी शैलेंद्र सिंह योगी न तो महंत हैं और न वह वाद मित्र बन सकते हैं। वादी की तरफ से अधिवक्ता डॉ. एसके द्विवेदी ने मसाजिद कमेटी की दलील का विरोध किया। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा दिए गए एक निर्णय की प्रति दाखिल की, जिसमें कहा गया है कि ज्ञानवापी मामले में विशेष पूजा स्थल अधिनियम लागू नहीं होता।