ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे को रोकने के लिए अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी ने आवेदन दिया। कहा गया कि चार महिला याचिकाकर्ताओं के आवेदन पर जिला जज ने 21 जुलाई को एएसआई सर्वे का आदेश दिया था। महिला वादिनियों की तरफ से सर्वे में आ रहे खर्च की फीस नहीं जमा की गई। बिना फीस जमा किए ही सर्वे किया जा रहा है, जो कानून के खिलाफ है। सर्वे के लिए एएसआई को रिट नहीं जारी की गई और न लिखित रूप से सर्वे की जानकारी दी गई।
जो सर्वे किया जा रहा है वह कानूनी प्रावधान की प्रक्रिया के विपरीत है। ऐसे में सामान्य नियम और सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत दिए गए प्रावधानों का पालन किए बगैर जो सर्वे किया जा रहा है उसे रोका जाए। इस आवेदन पर महिला वादिनियों की अधिवक्ता की तरफ से आपत्ति जताई गई। साथ ही आपत्ति दाखिल करने के लिए समय मांगा गया। इस पर अदालत ने 17 अगस्त की तिथि नियत कर दी।
ज्ञानवापी परिसर का सर्वे
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जिला जज की ही अदालत में राखी सिंह की तरफ से दिए गए उस आवेदन पर भी सुनवाई हुई जिसमे अंजुमन इंतजामिया मसाजिद की तरफ से आपत्ति दाखिल की गई। राखी सिंह का आवेदन मुस्लिमों के नमाज पढ़ने से रोक के उद्देश्य से दी गई है। सारे आरोप बेबुनियाद हैं और यह आवेदन खारिज होने योग्य है। इस पर राखी सिंह के अधिवक्ताओं मानबहादुर सिंह और सौरभ तिवारी ने प्रति आपत्ति दाखिल करने के लिए समय की मांग की। अदालत ने सुनवाई के लिए 17 अगस्त की अगली तिथि तय की।
अदालत में सुनवाई के दौरान ज्ञानवापी से जुड़े एक अन्य मामले में अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने अधिवक्ता सर्वे के दौरान मिले कथित शिवलिंग के दर्शन पूजन राग भोग के वाद पर कहा सभी पक्ष की आपत्ति आ गई है। इस मामले में सुनवाई के बाद आदेश जारी किए जाने का अनुरोध किया गया। सुनवाई के दौरान अंजुमन इंतजामिया की तरफ से मुमताज अहमद, रईस अहमद खान, तौहीद खान, मेराजुद्दीन सिद्दकी, एखलाक अहमद और हिन्दू पक्ष के चार महिला वादिनियों की तरफ से सुभाषनंदन चतुर्वेदी, दीपक सिंह, पवन पाठक, मदन मोहन यादव, भारत सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल अमित श्रीवास्तव के साथ ही राखी सिंह के पैरोकार जितेंद्र सिंह विसेन कोर्ट में मौजूद रहे।