उनकी देखरेख में आज भी अखाड़े में पारंपरिक मिट्टी की कुश्ती के दांव-पेंच सिखाए जाते हैं। यहां प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके अनेक पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर काशी और देश का नाम रोशन कर चुके हैं। अखाड़ा आज भी नई पीढ़ी के पहलवानों को तैयार करने का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है।
मनोहर सिंह यादव का कहना है कि आधुनिक दौर में भी काशी की प्राचीन मल्लविद्या और अखाड़ा संस्कृति को जीवित रखना जरूरी है। उनका मानना है कि पारंपरिक खेल युवाओं को शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ अनुशासन और संस्कार भी प्रदान करते हैं। आज भी अखाड़े में सुबह और शाम बड़ी संख्या में युवा मिट्टी को प्रणाम कर अभ्यास करते हैं, जो काशी में कुश्ती के प्रति आज भी बने उत्साह का प्रमाण है।
सम्मान समारोह में अंतरराष्ट्रीय पहलवान जमुना सिंह यादव, दिनेश पांडेय, चंदन सिंह यादव, बच्चेलाल यादव, राजेश यादव सहित बड़ी संख्या में पहलवान, शिष्य और खेल प्रेमी मौजूद रहे। सभी ने गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके दीर्घायु और स्वस्थ जीवन की कामना की।