Varanasi News: माता काली को विभिन्न प्रकार के फूलों से शृंगार करके हलवा, पूरी, खीर, बताशा और विभिन्न पकवानों का भोग लगाया गया। कुंवारी कन्याओं का पूजन करने के बाद उन्हें भोजन कराया।
काली मठ की मां काली सुख लुटाने वाली..., मां काली का शृंगार काशी की शान है... की धुन जब डॉ. अमलेश शुक्ला की आवाज में गूंजी तो कालीमठ का प्रांगण भक्ति भाव से झंकृत हो उठा। चैत्र नवरात्र के समापन पर बृहस्पतिवार को लक्ष्मीकुंड स्थित प्राचीन कालीमठ में दिव्य आराधना महोत्सव के तहत भजन संध्या, शृंगार और भंडारे का आयोजन हुआ।
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लक्सा स्थित प्राचीन कालीमठ में दशमी तिथि पर मां काली का शृंगार, हवन पूजन और कुंवारी कन्याओं के लिए भंडारा हुआ। मंदिर के पुजारी पं. विकास दुबे ने भोग लगाया। महंत पं. ठाकुर प्रसाद दुबे ने 21 वैदिक ब्राह्मणों के साथ पाठ के समापन पर हवन पूजन के बाद मां काली की आरती उतारी।
दिन में दंडी स्वामी मधुकरी और वैदिक बटुकों को भंडारा प्रसाद परोसा गया। शाम को गीतकार कन्हैया दुबे केडी के संयोजन में पूर्वांचल के सुविख्यात कलाकारों में अमलेश शुक्ला ने भजनों की प्रस्तुति दी। पीडीडीयू नगर के ओम तिवारी ने काली मैया के चरणों में सिर हो मेरा, फिर ना पूछो कि उस वक्त क्या बात हो..., जीभ लटकल होई मुंड के माला... की प्रस्तुति दी।
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बाल कलाकार यथार्थ दुबे ने हे काली मैया सुख करणी..., आस्था शुक्ला ने जय काली जय काली जय काली मां..., कृष्णा प्रेमी ने मेरी मां को बुला करके देखो..., अंशिका सिंह ने निमिया के डार मैया ...सहित अनेक देवी गीत पचरा भजन सुनाकर अपनी हाजिरी लगाई। तबले पर मोती शर्मा, ढोलक पर सनी, बैंजो पर सुरेश और पैड पर अजय ने संगत की।