इसका उदाहरण पूर्वांचल के पूर्व बाहुबली सांसद और आजमगढ़ के एक सफेदपोश के साथ ही एक विधायक के साथ गिरधारी की करीबी के तौर पर कई बार देखने को मिल चुकी है। पुलिस मुठभेड़ में गिरधारी के मारे जाने के साथ ही 2005 में जौनपुर में चेयरमैन के भाई की हत्या, 2008 में मऊ के घोसी में नंदू सिंह की हत्या, 2010 में मऊ शहर में सुनील सिंह की हत्या, 2011 में आजमगढ़ के डमरू सिंह की हत्या, 2013 में आजमगढ़ के जीयनपुर में पूर्व विधायक सर्वेश सिंह उर्फ सीपू की हत्या, 2019 में वाराणसी में नीतेश सिंह बबलू की हत्या और 2020 में लखनऊ में मऊ के पूर्व ज्येष्ठ उप प्रमुख अजीत सिंह की हत्या से जुड़े कुछ अहम राज शायद अब कभी सामने ना आ पाएं।