फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल: मुंबई में भोजपुरी छोड़कर सब फेस्टिवल होता है, अभिनेता अंजन ने बयां की अपनी पीड़ा

Sat, 08 Nov 2025 03:26 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: गाजीपुर स्थित गहमर के रहने वाले अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ने कहा कि मुंबई में भोजपुरी को छोड़कर सारे फेस्टिवल होते हैं। कहा कि बॉलीवुड में भोजपुरी पर बेहतर काम होना चाहिए। 
विज्ञापन
गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

छावनी स्थित होटल में शुक्रवार को साहित्य, संस्कृति और गिरमिटिया विरासत की थीम पर गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 का आगाज हुआ। वागले की दुनिया धारावाहिक और चाइनागेट व घातक फिल्म से प्रसिद्ध हुए अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ने अपनी पीड़ा बयां की। कहा कि मुंबई में गुजरात और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों की फिल्मों का महोत्सव होता है लेकिन भोजपुरी पर कभी कुछ नहीं होता। ऐसा इसलिए कि भोजपुरी को बहुत निचले दर्जे का समझा जाता है।

विज्ञापन


गाजीपुर स्थित गहमर के रहने वाले अभिनेता अंजन श्रीवास्तव ने कहा कि बॉलीवुड में भोजपुरी पर बेहतर काम होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यहीं पैदा हुआ लेकिन अर्थव्यवस्था चलाने के लिए कोलकाता जाना पड़ा। तब समझ में आया कि लोग बाहर पलायन क्यों कर जाते हैं। आज तक कभी कोई जमींदार ने पलायन नहीं किया। हमेशा पूर्वांचल के गरीबों को ही जाना पड़ा।

मुंबई में माया और काशी में अक्खड़ता का स्वभाव

पैनल चर्चा में आईं लेखिका नीरजा माधव ने कहा कि बनारस और गाजीपुर मुखौटे वाले शहर नहीं हैं। जो जैसा है वैसा ही खुद को प्रस्तुत करता है। हर शहर का अपना स्वभाव होता है। मुंबई में माया हावी है। बनारस में अक्खड़ मिलेंगे। हम किसी को कुछ नहीं मानते। घाट पर गमछा पहने भोजपुरी बोलने वाला व्यक्ति गुमटी वाला है या खरबपति ये नहीं बता सकते।

इसे भी पढ़ें; PM Modi in Varanasi: तस्वीरों में देखें- पीएम मोदी का भव्य स्वागत, हाथ हिलाकर काशीवासियों का किया अभिवादन

लेखक मृत्युंजय सिंह ने कहा कि कोलकाता में टैक्सी में ड्राइवर भोजपुरी गाने बजाते हैं तो लोग उसी आधार पर भोजपुरी को निम्न स्तरीय समझने की भूल कर देते हैं। भोजपुरी साहित्य के प्रतिनिधि मनोज भावुक ने भोजपुरी का प्रसार कर जड़ों से जुड़े रहने की बात कही। कहा कि इसी से भोजपुरी साहित्य का प्रसार होगा। मॉरीशस और फिजी में बसने वालों ने भोजपुरी को बचाए रखा लेकिन हम लोग भूलते जा रहे हैं।
विज्ञापन

चुनावों में जाति आधारित आकलन हर जगह

बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित चतुर्वेदी ने कहा कि चुनावों में जाति आधारित आकलन हर जगह होता है लेकिन यहां पर सिर्फ गाजीपुर-बलिया जैसे क्षेत्रों को जातिवादी क्यों बोला जाता है। इस बात को हमें स्वीकार करना होगा कि एक समान आकलन हो। किसी क्षेत्र को दोषी न ठहराया जाए। इस देश को एक और जय प्रकाश नारायण की जरूरत है।

अफ्रीकी देशों के प्रतिनिधि भी पहुंचे
उद्घाटन सत्र में देश और विदेश से कई प्रतिष्ठित अतिथि मौजूद रहे। दक्षिण अफ्रीका में भारत के हाई कमिश्नर प्रो. अनिल सूकलाल, दक्षिण अफ्रीका के सांस्कृतिक सलाहकार व प्रसिद्ध कवि जोलानी म्किवा, गयाना हाई कमीशन के डिप्लोमैट केशव तिवारी, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि मैट सिडेलो और कामिला यूनीक, गिरमिटिया विरासत से जुड़े कलाकार राज मोहन और रेमोन भगवानदीन और दक्षिण अफ्रीका से आईं निलिस्त्रा सूकलाल ने भोजपुरी से जुड़कर जड़ों की ओर लौटने की बात कही।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें